मध्य प्रदेश में मौसम का यू-टर्न: कोहरे के बाद अब बारिश की बारी, मौसम विभाग ने जारी किया नया अपडेट
Western Disturbance impact MP : मध्य प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर अपनी चाल बदल ली है। पिछले कुछ दिनों से लग रहा था कि शायद अब ठंड विदा लेने की तैयारी में है, लेकिन प्रकृति के मन में कुछ और ही चल रहा था। गुरुवार की सुबह जब प्रदेश के लोग सोकर उठे, तो नज़ारा बिल्कुल बदला हुआ था।
राज्य के 30 से ज़्यादा ज़िले घने कोहरे की सफेद चादर में लिपटे नज़र आए। यह कोहरा इतना गहरा था कि सड़कों पर पास की चीज़ें देखना भी दूभर हो गया।
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी और वहां से आने वाली सर्द हवाएं हैं। पहाड़ों पर जब बर्फ गिरती है, तो वहां की ठंडी हवाएं मैदानी इलाकों का रुख करती हैं और मध्य प्रदेश इसका सीधा असर झेल रहा है।
ठंडी हवाओं के कारण दिन का तापमान भी तेज़ी से नीचे गिरा है। अधिकांश ज़िलों में अब पारा 25 डिग्री सेल्सियस से कम हो गया है, जिससे दोपहर के समय भी हल्की ठिठुरन महसूस की जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि अभी बारिश नहीं हो रही है, लेकिन यह शांति केवल कुछ ही समय के लिए है। आने वाले दिनों में बादलों की लुका-छिपी और हल्की बूंदाबांदी की संभावना फिर से बन रही है।
गुरुवार को सबसे ज़्यादा असर ग्वालियर और चंबल संभाग में देखने को मिला। ग्वालियर जैसे शहरों में तो हालात ऐसे थे कि 50 मीटर की दूरी पर क्या है, यह अंदाजा लगाना भी मुश्किल था। जब दृश्यता या विजिबिलिटी इतनी कम हो जाती है, तो सबसे ज़्यादा खतरा सड़क पर चलने वाले वाहनों को होता है।
हाईवे पर चलने वाले ट्रक और बसें रेंगती हुई नज़र आईं। दतिया और रीवा में भी कोहरा काफी घना रहा और वहां दृश्यता 50 से 200 मीटर के बीच दर्ज की गई। उज्जैन, रतलाम और दमोह जैसे इलाकों में भी मध्यम दर्जे का कोहरा छाया रहा।
कोहरे की वजह से न केवल सड़कों पर यातायात प्रभावित हुआ, बल्कि इसका असर रेल और हवाई सेवाओं पर भी पड़ता है। जब आसमान साफ नहीं होता, तो उड़ानों में देरी होना आम बात है।
इसी तरह ट्रेनें भी अपने निर्धारित समय से पिछड़ने लगती हैं। आम लोगों के लिए सलाह दी जा रही है कि वे सुबह के समय वाहन चलाते वक्त फॉग लाइट का इस्तेमाल करें और गति को नियंत्रित रखें, क्योंकि अचानक सामने आने वाले वाहन या किसी मोड़ का अंदाज़ा नहीं मिल पाता।

अगर हम तापमान की बात करें, तो मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। राजगढ़ ज़िला इस समय प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका बनकर उभरा है। वहां न्यूनतम तापमान गिरकर 8.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। रात के समय वहां कड़ाके की ठंड पड़ रही है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि बाकी ज़िलों में पारा अभी भी 10 डिग्री के ऊपर बना हुआ है, लेकिन ठंडी हवाओं की वजह से सर्दी का एहसास काफी ज़्यादा है।
दिन के तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। नौगांव और पृथ्वीपुर जैसे इलाकों में अधिकतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा, जो सामान्य से काफी कम है। दूसरी तरफ, नर्मदापुरम एक ऐसा ज़िला रहा जहां अभी भी थोड़ी गर्मी महसूस की जा रही है,

वहां का अधिकतम तापमान 31.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मध्य प्रदेश की भौगोलिक विविधता की वजह से ही एक तरफ लोग ठिठुर रहे हैं, तो दूसरी तरफ कुछ इलाकों में अभी भी पंखे चलाने की नौबत आ रही है।
मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले कुछ दिन मौसम के लिहाज़ से काफी महत्वपूर्ण होने वाले हैं। उत्तर भारत में इस समय एक ‘पश्चिमी विक्षोभ’ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय है।
इसके साथ ही एक चक्रवाती हवाओं का घेरा भी बना हुआ है। इन दोनों प्रणालियों के मिलने से मध्य प्रदेश के ऊपर बादलों की आवाजाही बढ़ गई है। विभाग का अनुमान है कि 8 फरवरी को हिमालय के क्षेत्रों में एक और नया पश्चिमी विक्षोभ दस्तक देने वाला है।
इस नए सिस्टम का असर 10 फरवरी के आसपास मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश के रूप में दिख सकता है। अगर बारिश होती है, तो तापमान में एक बार फिर बड़ी गिरावट आएगी और सर्दी का एक और दौर शुरू हो जाएगा।
अगले कुछ दिनों तक मध्य प्रदेश में यही स्थिति बनी रहने की उम्मीद है। कोहरे और ठंडी हवाओं का यह मेल फिलहाल थमने वाला नहीं है। अगर आप कहीं यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखना ज़रूरी है।













