जेल की सलाखों के पीछे पनपा प्यार: डिप्टी जेलर और कैदी ने रचाई शादी, मजहब की दीवारें भी नहीं बन पाईं बाधा
- सतना जेल की डिप्टी जेलर फिरोजा खातून ने पूर्व कैदी धर्मेंद्र सिंह से हिंदू रीति-रिवाज से शादी की।
- धर्मेंद्र सिंह साल 2007 से हत्या के मामले में जेल में सजा काट रहे थे और वारंट शाखा में सहायक थे।
- जेल में काम के दौरान ही डिप्टी जेलर और कैदी के बीच नजदीकियां बढ़ीं और प्यार हो गया।
- अच्छे आचरण के कारण धर्मेंद्र को 3 साल पहले रिहा किया गया था, जिसके बाद दोनों ने विवाह का फैसला लिया।
- धार्मिक बाधाओं को दूर करने के लिए फिरोजा ने हिंदू धर्म अपनाया और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कन्यादान किया।
Satna Jail Love Story : मध्य प्रदेश के सतना और छतरपुर जिले इन दिनों एक ऐसी प्रेम कहानी के गवाह बने हैं, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। सतना सेंट्रल जेल में तैनात डिप्टी जेलर फिरोजा खातून ने इसी जेल के पूर्व कैदी धर्मेंद्र सिंह के साथ 5 मई को शादी कर ली है। यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं है, बल्कि समाज की रूढ़ियों और धर्म की सीमाओं को पार करने की एक मिसाल भी है।
करीब 18 साल पहले हत्या के एक मामले में जेल पहुंचे धर्मेंद्र का अच्छा आचरण उन्हें न केवल रिहाई तक ले गया, बल्कि उन्हें जीवन संगिनी के रूप में जेल की अधिकारी फिरोजा का साथ भी मिला। छतरपुर में हिंदू रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई इस शादी ने अब पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
इस कहानी की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। छतरपुर के चंदला निवासी धर्मेंद्र सिंह को नगर परिषद उपाध्यक्ष की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा हुई थी। सजा काटने के लिए उन्हें सतना सेंट्रल जेल भेजा गया। जेल में धर्मेंद्र का व्यवहार काफी अच्छा रहा, जिसे देखते हुए प्रशासन ने उन्हें जेल के दफ्तर में सहायक के तौर पर काम करने की जिम्मेदारी सौंपी।

इसी दौरान रीवा की रहने वाली फिरोजा खातून पीएससी परीक्षा पास कर डिप्टी जेलर बनीं और उनकी पोस्टिंग सतना जेल की वारंट शाखा में हुई। धर्मेंद्र इसी शाखा में फाइलों और दस्तावेजों को संभालने में फिरोजा की मदद करते थे। साथ काम करते-करते दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और यह परिचय धीरे-धीरे गहरे प्रेम में बदल गया।
धर्मेंद्र ने जेल में लगभग 15 साल बिताए और उनके बेहतर आचरण की वजह से करीब 3 साल पहले जेल प्रशासन ने उन्हें रिहा कर दिया। जेल से बाहर आने के बाद भी फिरोजा और धर्मेंद्र का संपर्क टूटा नहीं। धर्मेंद्र अक्सर सतना जाकर फिरोजा से मिलते थे।
करीब 18 साल की उम्र में जेल जाने वाले धर्मेंद्र के लिए बाहरी दुनिया नई थी, लेकिन फिरोजा का साथ उन्हें मजबूती देता रहा। जब दोनों ने शादी करने का फैसला किया, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग धर्म और सामाजिक स्वीकार्यता की थी। धर्मेंद्र हिंदू थे और फिरोजा मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती थीं।
शादी की राह आसान नहीं थी क्योंकि दोनों के परिवार इस रिश्ते के खिलाफ थे। फिरोजा ने अपने प्यार के लिए हिंदू धर्म अपना लिया, लेकिन कन्यादान की समस्या खड़ी हो गई क्योंकि उनका परिवार इस शादी में शामिल नहीं था। इस मुश्किल घड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता राजबहादुर और सचिन शुक्ला आगे आए।
राजबहादुर ने फिरोजा का कन्यादान करने का फैसला किया और सचिन ने भाई का फर्ज निभाया। 5 मई को छतरपुर में पूरे रीति-रिवाजों के साथ यह शादी संपन्न हुई। फिरोजा अब फिरोजा से ‘आरती’ बन चुकी हैं और धर्मेंद्र के साथ अपने नए जीवन की शुरुआत कर रही हैं।
जेल नियमों के मुताबिक, किसी कैदी और जेल अधिकारी के बीच इस तरह के संबंधों को लेकर कड़े नियम होते हैं, लेकिन धर्मेंद्र अब एक स्वतंत्र नागरिक हैं और अपनी सजा पूरी कर चुके हैं। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यह दो वयस्कों का निजी फैसला है।
धर्मेंद्र ने जेल में रहते हुए सुधार का जो रास्ता अपनाया, उसी का नतीजा है कि आज वह समाज की मुख्यधारा में लौट सके हैं। यह कहानी बताती है कि सुधार की मंशा हो तो जेल की दीवारें भी इंसान के भविष्य को बेहतर बनाने से नहीं रोक सकतीं।












