एमपी में मौसम का तांडव: कई जिलों में गिरे ओले, 28 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी
मध्य प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम बिगड़ गया है। शाजापुर और गुना में ओले गिरे हैं, जबकि 28 जिलों में बारिश और घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है।
Kal Ka Mausam : मध्य प्रदेश के मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट ले ली है। राज्य के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड के बीच अब बारिश और ओलावृष्टि का दौर शुरू हो गया है जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मंगलवार को शाजापुर, आगर-मालवा और गुना जैसे जिलों में आसमान से गिरे ओलों ने सफेद चादर बिछा दी।
इसके साथ ही करीब 18 जिलों में तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश दर्ज की गई है। अचानक आए इस बदलाव ने न केवल तापमान में गिरावट ला दी है बल्कि खेतों में पककर तैयार हो रही फसलों के लिए भी संकट खड़ा कर दिया है।
मौसम विभाग ने राज्य के 28 जिलों के लिए बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से ग्वालियर, भिंड, मुरैना और श्योपुर जैसे इलाकों में घने कोहरे के साथ ओले गिरने की संभावना को देखते हुए ‘ऑरेंज अलर्ट’ घोषित किया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार तेज आंधी और बारिश की वजह से फसलों को काफी नुकसान पहुँचा है। शाजापुर और रतलाम में हवाओं की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई जगहों पर पेड़ और बिजली के खंभों को भी नुकसान पहुँचा है।
इस बेमौसम बदलाव के पीछे वैज्ञानिक कारण भी काफी सक्रिय हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान में उत्तर पाकिस्तान के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है जो चक्रवातीय हवाओं के रूप में मौजूद है। इसके अलावा राजस्थान के दक्षिणी हिस्से में भी एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इन दो प्रणालियों के आपस में मिलने और अरब सागर से आ रही नमी के कारण मध्य प्रदेश के आसमान में घने बादल छाए हुए हैं और बारिश हो रही है।
आने वाले दिनों में राहत मिलने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है। मौसम विभाग का कहना है कि 30 जनवरी की रात से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत में दस्तक देने वाला है। इसका सीधा असर मध्य प्रदेश के मौसम पर पड़ेगा जिससे ठंड और बारिश का यह सिलसिला फरवरी के शुरुआती दिनों तक खिंच सकता है। भोपाल, विदिशा, रायसेन और सीहोर जैसे जिलों में भी गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की आशंका बनी हुई है।
किसानों के लिए यह समय सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। गेहूं, चना और सरसों की फसलें इस समय खेतों में संवेदनशील स्थिति में हैं। ओलों की मार से इन फसलों के टूटने और गलने का डर बना हुआ है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें और मौसम साफ होने तक कीटनाशकों या उर्वरकों का छिड़काव न करें। प्रशासन भी नुकसान का जायजा लेने की तैयारी कर रहा है ताकि प्रभावित किसानों की मदद की जा सके।











