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Jabalpur Bargi Dam Tragedy : हाई कोर्ट की अपील, अगर आपके पास हैं तस्वीरें या वीडियो तो जांच आयोग को सौंपें

Jabalpur High Court : जबलपुर के बरगी डैम में बीती 30 अप्रैल को हुआ दर्दनाक क्रूज हादसा अब केवल सरकारी फाइलों और बंद कमरों की जांच तक सीमित नहीं रहेगा। मंगलवार को जबलपुर हाई कोर्ट की मुख्यपीठ ने इस मामले से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आम नागरिकों, प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिवारों से जांच में सहयोग करने की एक बड़ी अपील की है।

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति के पास घटना से जुड़े फोटो, वीडियो या कोई भी पुख्ता जानकारी है, तो वे उसे न्यायिक जांच आयोग के सामने बेझिझक पेश कर सकते हैं।

सरकार ने कोर्ट को बताया कि मामले की गहराई से पड़ताल के लिए रिटायर्ड जस्टिस संजय द्विवेदी की अगुवाई में एक हाई लेवल न्यायिक जांच आयोग बना दिया गया है, जो अगले तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।

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हाई कोर्ट का सख्त रुख और याचिकाओं का निपटारा

हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच इस बड़े हादसे को लेकर काफी गंभीर नजर आई। कोर्ट में हादसे को लेकर तीन अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट के सामने अपना पूरा जवाब पेश किया। सरकार के इस कदम को रिकॉर्ड पर लेते हुए कोर्ट ने सभी याचिकाओं को निपटा दिया है।

अदालत ने साफ किया कि इस हादसे के पीछे की असली वजह और प्रशासनिक कमियों को सामने लाना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोका जा सके। आम जनता की भागीदारी से इस जांच को अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाया जा सकेगा।

तीन महीने में आएगी रिपोर्ट, पूरे प्रदेश में क्रूज संचालन बंद

सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि नवगठित न्यायिक जांच आयोग तीन महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश कर देगा। इसके साथ ही सरकार ने एक और बड़ा सुरक्षा कदम उठाया है। जब तक पूरे मध्य प्रदेश में चल रहे सभी क्रूज और बोट क्लबों का पूरी तरह से सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit) नहीं हो जाता, तब तक उनके संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, अंतर्देशीय पोत अधिनियम (Inland Vessels Act) के तहत ऐसे पर्यटन स्थलों पर चलने वाले हर छोटे-बड़े जहाज या बोट के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट, लाइफ जैकेट की उपलब्धता और क्षमता से अधिक यात्री न बैठाने जैसे नियमों का कड़ाई से पालन होना जरूरी है। इस ऑडिट में इन्हीं सब बिंदुओं की बारीकी से जांच होगी।

एमपी टूरिज्म और अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही

यह जांच आयोग मुख्य रूप से इस बात का पता लगाएगा कि मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग (MP Tourism) और इससे जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों के स्तर पर कहां चूक हुई। किन तकनीकी या प्रशासनिक कमियों की वजह से इतना बड़ा हादसा घटित हुआ, इसकी पूरी लिस्ट तैयार होगी।

याचिकाकर्ता पुष्पा तिवारी की तरफ से पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट गोपेश यश तिवारी ने कोर्ट के बाहर बताया कि आयोग की यह रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर उन सभी दोषी अधिकारियों की पहचान की जाएगी जिनकी लापरवाही ने 13 मासूम लोगों की जान ले ली। कानून के मुताबिक, दोषियों पर सख्त प्रशासनिक और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

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13 लोगों की गई थी जान, मजदूरों ने दिखाई थी बहादुरी

30 अप्रैल की वो शाम जबलपुर के लिए किसी काले सपने जैसी थी, जब बरगी डैम में सैर पर निकला एक क्रूज अचानक पानी में डूब गया। इस हादसे में 13 लोगों की असमय मौत हो गई, जिनमें 8 महिलाएं और 4 बच्चे शामिल थे। इस भीषण हादसे के बाद प्रशासन ने करीब 60 घंटे तक एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, जिसके बाद ही सभी शवों को पानी से बाहर निकाला जा सका।

हालांकि, इस दर्दनाक हादसे के बीच इंसानियत और बहादुरी की एक बड़ी मिसाल भी देखने को मिली। घटना के वक्त वहां मौजूद जल निगम के इंटेकवेल पर काम कर रहे 22 से ज्यादा मजदूरों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए तुरंत मोर्चा संभाला। इन जांबाज मजदूरों ने सूझबूझ दिखाते हुए डूब रहे 28 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक और बड़ा नुकसान होने से बच गया।

आप कैसे दर्ज करा सकते हैं अपने सबूत?

न्यायिक जांच आयोग द्वारा आम जनता से सबूत मांगना एक स्थापित कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। जांच आयोग (केंद्रीय) नियम, 1972 के नियम 5(2)(b) के तहत आयोग को यह अधिकार है कि वह एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर लोगों से बयान, दस्तावेज, फोटो या वीडियो सामग्री मांग सके।

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अगर आपके पास इस हादसे से जुड़ा कोई भी डिजिटल या लिखित साक्ष्य है, तो आप उसे एक शपथ पत्र (Affidavit) के माध्यम से आयोग के सामने जमा कर सकते हैं। यह शपथ पत्र कानूनी रूप से मान्य होता है और इसके आधार पर आयोग अपनी जांच को आगे बढ़ाता है। जनता की यह सजगता पीड़ितों को न्याय दिलाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती है।

Alok Singh

मेरा नाम आलोक सिंह है मैं भगवान नरसिंह की नगरी नरसिंहपुर से हूं ।और पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में आया था ।मुझे पत्रकारिता मैं इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का 20 वर्ष का अनुभव है खबरों को प्रमाणिकता के साथ लिखने के हुनर में माहिर हूं।

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