MP Transfer Policy 2026 News | मध्य प्रदेश में मंत्रियों की सिफारिशों पर लगेगा ब्रेक, जानें नई तबादला नीति के 5 बड़े बदलाव
- मध्य प्रदेश में 20 मई 2026 के आस-पास लागू हो सकती है नई तबादला नीति।
- जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की थोकबंद सिफारिशों की होगी कड़ी प्रशासनिक जांच।
- पिछले साल की गलतियों से सबक लेते हुए ऑफलाइन ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी तरह बंद।
- किसी भी विभाग में अधिकतम 10 से 20 फीसदी कर्मचारियों का ही हो सकेगा तबादला।
- ट्रांसफर के बाद कर्मचारियों की सहूलियत जानने के लिए शुरू होगा नया फीडबैक सिस्टम।
MP Transfer Policy 2026 News | मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के निर्देशों के बाद मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर नई नीति लगभग तैयार हो चुकी है। राज्य सरकार आगामी 20 मई के आस-पास नई तबादला नीति 2026 को लागू करने की तैयारी में है।
इस बार प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए नीति में कई अहम बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की मनमानी सिफारिशों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
थोकबंद सिफारिशों का दौर खत्म, अब होगी कड़ी जांच
मध्य प्रदेश की नई तबादला नीति में सबसे बड़ा बदलाव राजनीतिक सिफारिशों को लेकर किया जा रहा है। अब नेता या जनप्रतिनिधि कर्मचारियों के तबादलों के लिए थोक के भाव सिफारिशें नहीं कर सकेंगे।
अगर कोई जनप्रतिनिधि ऐसी सिफारिश भेजता भी है, तो प्रशासन पहले उसकी गहराई से जांच करेगा। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, सरकार का मुख्य उद्देश्य ट्रांसफर उद्योग पर पूरी तरह रोक लगाना और योग्य कर्मचारियों को सही जगह पर काम करने का अवसर देना है।
शत-प्रतिशत ऑनलाइन प्रक्रिया, ऑफलाइन पर पूरी तरह रोक
पिछले साल सरकार ने ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य किए थे, लेकिन कई विभागों और मंत्रियों ने इसका ठीक से पालन नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को आखिरी समय तक यह पता लगाने में मशक्कत करनी पड़ी कि किस विभाग में कितने तबादले हुए हैं।
इस बार इस कमी को पूरी तरह दुरुस्त कर लिया गया है। अब बिना ऑनलाइन आवेदन के कोई भी ट्रांसफर नहीं होगा। यहां तक कि विभागीय मंत्री भी केवल ऑनलाइन माध्यम से ही अपनी सिफारिश आगे बढ़ा सकेंगे।
कामकाज न हो प्रभावित, इसलिए तय हुई ट्रांसफर की सीमा
प्रशासनिक कामकाज में निरंतरता बनाए रखने के लिए सरकार ने इस बार कड़े पैरामीटर तय किए हैं। विभाग प्रमुखों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे सुनिश्चित करें कि किसी भी विभाग में कुल कार्यबल के 10 से 20 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों का तबादला न हो।
इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण नियम यह भी जोड़ा गया है कि किसी भी कार्यालय या विभाग में 50 प्रतिशत से अधिक नए कर्मचारी बाहर से न आएं, क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर नए लोगों के आने से वहां का दैनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
कर्मचारियों के लिए राहत और अनूठा फीडबैक सिस्टम
डॉ. मोहन यादव सरकार इस बार शासकीय सेवकों और उनके परिवारों की सहूलियत का विशेष ध्यान रख रही है। नई नीति में एक बेहद अनोखा फीडबैक सिस्टम लागू किया जा रहा है। इसके तहत जिन कर्मचारियों का तबादला होगा,
उनसे सीधे पूछा जाएगा कि इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें किसी परेशानी या प्रशासनिक लापरवाही का सामना तो नहीं करना पड़ा। इसके साथ ही, गंभीर रूप से बीमार कर्मचारियों, दिव्यांगों और ऐसे पति-पत्नी जो दोनों ही सरकारी सेवा में हैं, उन्हें एक ही स्थान पर पोस्टिंग देने के मामले में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलेगी।
कम समय में निपटेंगे ट्रांसफर, सुनवाई के लिए मिलेंगे 10 दिन
इस साल तबादलों की पूरी समयावधि को पिछले साल के मुकाबले 10 दिन कम किया जा सकता है। पिछले वर्ष ट्रांसफर की प्रक्रिया मई से शुरू होकर जून के मध्य तक खिंच गई थी, जिससे सरकारी काम प्रभावित हुआ था।
इस बार समय सीमा को सीमित रखा जाएगा। हालांकि, जो कर्मचारी अपने तबादले से असंतुष्ट हैं, उन्हें अपनी आपत्ति दर्ज कराने और सुनवाई के लिए पूरे 10 दिन का समय दिया जाएगा, ताकि किसी के साथ भी अन्याय न हो।












