शाजापुर में बड़ा हादसा: इंदौर-ग्वालियर स्लीपर बस में लगी भीषण आग, 4 साल के मासूम की दर्दनाक मौत
- मध्य प्रदेश के शाजापुर में नेशनल हाईवे-52 पर इंदौर से ग्वालियर जा रही एक एसी स्लीपर बस में भीषण आग लग गई।
- हादसे में एक 4 साल के मासूम बच्चे की जिंदा जलकर मौत हो गई, जिसका शव सीट के नीचे मिला।
- बस में सवार 36 यात्रियों में से 22 लोगों ने खिड़कियों के कांच तोड़कर बमुश्किल अपनी जान बचाई।
- यात्रियों का आरोप है कि ड्राइवर ने वायरिंग जलने की शिकायत को अनदेखा किया और हादसा होते ही फरार हो गया।
MP News Live : मध्य प्रदेश के शाजापुर में नेशनल हाईवे-52 पर देर रात एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। इंदौर से ग्वालियर जा रही इंटरसिटी ट्रेवल्स की एक एसी स्लीपर वॉल्वो बस में अचानक भीषण आग लग गई। इस हादसे में एक 4 साल के मासूम बच्चे की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि अन्य यात्रियों ने खिड़कियों के कांच तोड़कर बमुश्किल अपनी जान बचाई।
यह घटना शाजापुर और मक्सी के बीच गोलवा के पास तब हुई, जब बस एक होटल के सामने चाय-नाश्ते के लिए रुकी थी। घटना की सूचना मिलते ही उज्जैन जिले की तराना थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शुरुआती जांच में आग की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है, लेकिन इस हादसे ने सवारी बसों में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इंटरसिटी ट्रेवल्स की यह बस जब हाईवे पर स्थित होटल जैन पथ के सामने रुकी, तब उसमें कुल 36 यात्री सवार थे। चाय-नाश्ते के लिए कुछ यात्री बस से नीचे उतर चुके थे, जबकि करीब 22 यात्री अंदर ही सो रहे थे। इसी दौरान अचानक बस से धुंआ उठने लगा और देखते ही देखते पूरी बस आग की लपटों में घिर गई।
आग लगते ही बस के अंदर चीख-पुकार मच गई। अफरा-तफरी के माहौल के बीच बस का मुख्य दरवाजा अचानक लॉक हो गया और आपातकालीन (इमरजेंसी) गेट भी नहीं खुल पाया। जान बचाने के लिए यात्रियों ने सूझबूझ दिखाई और बस के कांच फोड़कर किसी तरह बाहर निकलना शुरू किया। आस-पास के लोगों की मदद से 22 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन इस भगदड़ में एक मासूम बच्चा पीछे छूट गया।
हादसे के वक्त एक मां अपने 4 साल के बच्चे को साथ लेकर बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन आग की लपटों और धुएं के कारण वो अलग हो गए। जब आग पर काबू पाया गया और परिजनों ने बच्चे की तलाश शुरू की, तो उसका कहीं पता नहीं चला।
बाद में जब पुलिस और बचाव दल ने बस के अंदर मलबे को हटाया, तो सीट के नीचे मासूम का जला हुआ शव मिला। इस मंजर को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। हादसे में यात्रियों का सारा सामान भी जलकर खाक हो गया है।
नियमों के मुताबिक लंबी दूरी की कमर्शियल और स्लीपर बसों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (FDSS) और पर्याप्त अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) होना अनिवार्य है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के सख्त निर्देश हैं कि बसों में आपातकालीन निकास पूरी तरह चालू हालत में होने चाहिए।
हालांकि, इस बस के यात्रियों ने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। यात्रियों का कहना है कि सफर के दौरान ही उन्हें बस की वायरिंग जलने की बदबू आ रही थी। उन्होंने इसकी शिकायत ड्राइवर से भी की थी, लेकिन ड्राइवर ने इस चेतावनी को पूरी तरह अनदेखा कर दिया। इसके अलावा, बस में न तो कोई चालू इमरजेंसी गेट था और न ही आग बुझाने के कोई उपकरण मौजूद थे। हादसा होते ही ड्राइवर और कंडक्टर यात्रियों को मुसीबत में छोड़कर मौके से फरार हो गए।
हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों में प्रशासन को लेकर गहरा आक्रोश देखा गया। यात्रियों का आरोप है कि आग लगने की तुरंत सूचना देने के बाद भी फायर ब्रिगेड की टीम करीब आधे घंटे की देरी से पहुंची। अगर फायर ब्रिगेड समय पर आ जाती, तो शायद नुकसान कम होता।
बाद में शाजापुर, मक्सी और तराना से फायर ब्रिगेड की 5 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया गया। इस दर्दनाक हादसे के कारण नेशनल हाईवे-52 के दोनों तरफ सुरक्षा के लिहाज से ट्रैफिक को रोकना पड़ा, जिससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। फिलहाल तराना थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर बस की तकनीकी जांच शुरू कर दी है और फरार ड्राइवर-कंडक्टर की तलाश की जा रही है।












