देवास पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट: मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा एक्शन, SDM और SDOP समेत तीन बड़े अधिकारी सस्पेंड
- देवास पटाखा फैक्ट्री हादसा: सीएम मोहन यादव का कड़ा रुख, तीन बड़े अफसर सस्पेंड
- MP News: देवास ब्लास्ट मामले में मुख्यमंत्री की बड़ी कार्रवाई, SDM और पुलिस अधिकारी निलंबित
- देवास में पटाखा फैक्ट्री धमाके के बाद हड़कंप, मुख्यमंत्री ने दिए सख्त जांच के आदेश
- Dewas Blast Update: लापरवाही पर भड़के सीएम मोहन यादव, अधिकारियों पर गिरी गाज
Dewas News Live : मध्यप्रदेश के देवास जिले की टोंकखुर्द तहसील में 14 मई को एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। इस दर्दनाक हादसे में कई लोगों की जान जाने और कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने के तुरंत बाद सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर क्षेत्र के एसडीएम, नायब तहसीलदार और एसडीओ (पुलिस) को कर्तव्य में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आम जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
नियमों की अनदेखी पड़ी भारी, अधिकारियों पर गिरी गाज
प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, टोंकखुर्द के टप्पा चिडावद क्षेत्र में संचालित इस पटाखा फैक्ट्री में हुए हादसे के पीछे स्थानीय प्रशासन की घोर उदासीनता सामने आई है। संभागायुक्त द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि एसडीएम संजीव सक्सेना और नायब तहसीलदार रवि शर्मा ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही और अनियमितता बरती।
इन अधिकारियों ने क्षेत्र में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों और सुरक्षा मानकों की समय पर निगरानी नहीं की, जिसे अनुशासनहीनता और कदाचरण की श्रेणी में माना गया है। निलंबन की अवधि के दौरान दोनों अधिकारियों को देवास कलेक्टर कार्यालय में संबद्ध (अटैच) किया गया है।
पुलिस प्रशासन पर भी हुई सख्त कार्रवाई
इस हादसे की आंच केवल प्रशासनिक अमले तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि पुलिस विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी मुख्यमंत्री का हंटर चला है। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, एसडीओ (पुलिस) दीपा मांडवे को समय-समय पर शासन स्तर से जारी निर्देशों के बावजूद फैक्ट्री के संचालन का नियमित निरीक्षण न करने का दोषी पाया गया है।

उन्होंने सुरक्षा मानकों को लेकर वरिष्ठ कार्यालय को कोई प्रतिवेदन या रिपोर्ट भी प्रेषित नहीं की थी। इस कृत्य को कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही मानते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय भेजा गया है।
पीड़ितों को आर्थिक मदद और उच्च स्तरीय जांच के निर्देश
इस दर्दनाक हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का एलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन को घायल लोगों के समुचित और बेहतर इलाज की व्यवस्था करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
शासन ने इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम को मौके पर भेजा है, जो इस बात की जांच कर रही है कि रिहायशी या ग्रामीण इलाकों के नजदीक सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर यह फैक्ट्री कैसे संचालित हो रही थी।
सुरक्षा मानकों को लेकर सख्त हैं नियम
मध्यप्रदेश में पटाखा फैक्ट्रियों में होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विस्फोटक अधिनियम के तहत बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं। इन नियमों के अनुसार स्थानीय प्रशासन और पुलिस टीम को हर महीने ऐसी फैक्ट्रियों का औचक निरीक्षण करना होता है।
इसमें बारूद की तय मात्रा, आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम और काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा की जांच अनिवार्य है। देवास की इस घटना ने एक बार फिर जमीनी स्तर पर इन नियमों के पालन में होने वाली ढिलाई को उजागर किया है, जिसके बाद राज्य सरकार ने यह त्वरित और सख्त कार्रवाई कर प्रशासनिक अमले को जवाबदेह बनाने का प्रयास किया है।













