कलेक्टर को किसान के बेटे ने पिलाई ऐसी चाय, गुस्सा होने के बजाय उसे गले लगा लिया
Tikamgarh Latest News : मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के जुड़ावन गांव में शुक्रवार की रात एक अनोखी प्रशासनिक चौपाल सजी। ‘प्रशासन गांव की ओर’ अभियान के तहत पहुंचे जिला कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने न केवल रातभर गांव में रुककर लोगों की समस्याएं सुनीं, बल्कि सुबह एक ऐसी चाय की चुस्की ली जिसे वह जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे।
दरअसल, सुबह सैर पर निकले कलेक्टर को एक किसान के बेटे ने बड़े चाव से चाय पिलाई, लेकिन हड़बड़ी में शक्कर की जगह नमक डाल दिया। इस पर नाराज होने के बजाय कलेक्टर मुस्कुराए और बोले कि यह चाय हमेशा याद रहेगी।
चौपाल में मौके पर ही निपटाए 35 मामले
इस चौपाल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं का उनके घर पर ही समाधान करना था। कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय के साथ एसडीएम संस्कृति लिटौरिया और तहसीलदार सत्येंद्र गुर्जर भी इस अभियान का हिस्सा बने। अधिकारियों ने देर रात तक बैठकर ग्रामीणों की एक-एक कर शिकायतें सुनीं।

इस दौरान सबसे ज्यादा राहत राजस्व विभाग से जुड़े मामलों में मिली, जहां 35 प्रकरणों का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया। कलेक्टर श्रोत्रिय ने संवेदनशीलता दिखाते हुए सभी हितग्राहियों के मोबाइल नंबर भी लिए, ताकि उनके आदेश की प्रति तैयार होने के बाद उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर उसे सौंपा जा सके।
वीआईपी कल्चर छोड़ खाट पर गुजारी रात
चौपाल की कार्रवाई खत्म होने के बाद कलेक्टर ने किसी सरकारी रेस्ट हाउस या आलीशान होटल में जाने के बजाय गांव की मिट्टी से जुड़ना बेहतर समझा। वह गांव के ही एक खेत में बिछी साधारण खाट पर सो गए।
कलेक्टर ने बताया कि बहुत लंबे समय बाद उन्हें प्रकृति के बीच इस तरह रात बिताने का मौका मिला है। रात के करीब 12 बजे सोने के बाद सुबह 5 बजे खुले आसमान के नीचे उनकी नींद अपने आप खुल गई। उन्होंने महसूस किया कि इस वातावरण में सोकर वह बेहद हल्का और तरोताजा महसूस कर रहे थे। इसके बाद उन्होंने पारंपरिक तरीके से नीम की दातुन तोड़ी, मुंह साफ किया और तहसीलदार के साथ गांव की सैर पर निकल पड़े।
जब चाय की पहली चुस्की पर मिला नमकीन स्वाद
सुबह टहलते हुए कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय और तहसीलदार सत्येंद्र गुर्जर एक किसान के खेत पर बने घर के पास पहुंचे। वहां चूल्हे पर गरमा-गरम चाय उबल रही थी। कलेक्टर ने जब चूल्हे पर चाय बनती देखी, तो वह खुद को रोक नहीं पाए और वहीं जमीन पर किसान के पास बैठ गए।
कुछ ही देर में किसान का बेटा बड़े आदर के साथ चाय छानकर लाया। कलेक्टर ने जैसे ही चाय का कुल्हड़ होंठों से लगाया और पहली चुस्की ली, उन्हें मीठे की जगह कुछ अलग स्वाद आया। उन्होंने तुरंत किसान से पूछा कि क्या आप लोग सुबह नमक वाली चाय पीते हैं? किसान ने हैरान होकर कहा कि नहीं साहब, हम तो शक्कर की ही चाय पीते हैं। इस पर कलेक्टर बोले कि फिर इस चाय का स्वाद नमकीन क्यों लग रहा है?
गुस्से की जगह चेहरे पर आई मुस्कान
कलेक्टर की बात सुनकर जब किसान ने खुद चाय की चुस्की ली, तो वह भी सन्न रह गया। चाय में वाकई नमक था। इस बीच पास खड़े किसान के बेटे को अपनी भूल का अहसास हुआ। उसने झिझकते और डरते हुए बताया कि हड़बड़ी में उससे शक्कर के डिब्बे की जगह नमक का डिब्बा उठ गया और उसने चाय में नमक डाल दिया।
आमतौर पर किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी के सामने ऐसी गलती होने पर लोग सहम जाते हैं, लेकिन कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने माहौल को पूरी तरह हल्का कर दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि कोई बात नहीं, यह नमक वाली चाय मुझे हमेशा याद रहेगी। कलेक्टर की इस सादगी और अपनत्व भरे व्यवहार ने वहां मौजूद सभी ग्रामीणों का दिल जीत लिया और अब इस घटना की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है।













