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MP Wheat MSP Registration 2026 : मध्य प्रदेश में गेहूं पंजीयन शुरू, ऐसे कराएं रजिस्ट्रेशन

मध्य प्रदेश में 7 फरवरी से गेहूं पंजीयन शुरू हो रहा है। ₹2585 एमएसपी तय की गई है। आधार-खसरे में नाम समान होना जरूरी है और भुगतान सुरक्षा के लिए ₹1 वेरिफाई किया जाएगा।

MP Wheat MSP Registration 2026 मध्य प्रदेश के लाखों किसानों के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। खेतों में लहलहाती गेहूं की सुनहरी फसल अब कटाई की ओर बढ़ रही है और इसी के साथ राज्य सरकार ने किसानों को उनकी मेहनत का सही मोल दिलाने की तैयारी भी पूरी कर ली है। मध्य प्रदेश में इस बार गेहूं की सरकारी खरीदी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिक्री के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।

यह खबर उन किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो अपनी फसल को बिचौलियों के बजाय सीधे सरकार को बेचना चाहते हैं। इस बार की पंजीकरण प्रक्रिया में कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर आपकी जेब और भुगतान की सुरक्षा पर पड़ेगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान को पैसा मिलने में किसी भी तरह की तकनीकी रुकावट न आए।

गेहूं पंजीयन की तारीख और नया समर्थन मूल्य

मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने इस साल गेहूं की खरीदी के लिए पंजीकरण की तारीखों का ऐलान कर दिया है। 7 फरवरी 2026 से राज्य भर में पंजीकरण केंद्र खुल जाएंगे और किसान अपनी फसल का ब्योरा सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करा सकेंगे। यह प्रक्रिया पूरे एक महीने तक यानी 7 मार्च 2026 तक चलेगी।

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इस बार किसानों के लिए सबसे उत्साहजनक बात यह है कि सरकार ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अच्छी बढ़ोतरी की है। इस साल गेहूं का एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। अगर हम पिछले साल की बात करें, तो यह पिछले वर्ष के मुकाबले 160 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। यह बढ़ोतरी किसानों की लागत और मेहनत को ध्यान में रखते हुए की गई है, ताकि उन्हें खेती में बेहतर मुनाफा मिल सके।

नाम और स्पेलिंग की समानता है अनिवार्य

अक्सर देखा गया है कि किसानों के आधार कार्ड पर नाम की स्पेलिंग कुछ और होती है और उनके जमीन के सरकारी दस्तावेजों यानी खसरे में नाम थोड़ा अलग होता है। पिछली बार कई किसानों को इस वजह से भुगतान मिलने में देरी हुई थी। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए मध्य प्रदेश राज्य आपूर्ति निगम ने इस बार नियमों को थोड़ा सख्त कर दिया है। अब पंजीयन तभी सफल माना जाएगा जब आपके आधार कार्ड और खसरे में दर्ज नाम की स्पेलिंग पूरी तरह से एक जैसी होगी।

अगर किसी किसान के इन दोनों दस्तावेजों में नाम अलग-अलग है, तो उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन उन्हें तुरंत कदम उठाना होगा। पंजीकरण की तारीख शुरू होने से पहले ही आपको अपनी नजदीकी तहसील कार्यालय जाकर इस विसंगति को दूर करना होगा। तहसील से वेरिफिकेशन होने के बाद ही आपका पंजीकरण केंद्र पर स्वीकार किया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि भविष्य में जब पैसा सीधे आपके खाते में आए, तो डेटा मिसमैच होने की वजह से ट्रांजेक्शन फेल न हो।

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भुगतान की सुरक्षा के लिए ₹1 वाला नया नियम

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने इस साल एक बहुत ही अनोखी और सुरक्षित व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। पंजीकरण के दौरान ही सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसान का बैंक खाता सक्रिय है या नहीं। इसके लिए जैसे ही किसान का रजिस्ट्रेशन होगा, मध्य प्रदेश राज्य आपूर्ति निगम उनके आधार से लिंक बैंक खाते में 1-1 रुपये भेजकर वेरिफिकेशन करेगा।

इस प्रक्रिया को ‘पेनी ड्रॉप’ टेस्ट भी कहा जाता है। अगर किसान के खाते में वह एक रुपया सफलतापूर्वक पहुंच जाता है, तो इसका मतलब है कि भविष्य में फसल का पूरा भुगतान भी उसी खाते में सुरक्षित तरीके से आ जाएगा। यदि भुगतान फेल हो जाता है, तो किसान को तुरंत सूचित किया जाएगा ताकि वह अपना खाता नंबर या आधार लिंकिंग सही करवा सके। इससे वह परेशानी खत्म हो जाएगी जिसमें फसल बेचने के महीनों बाद भी किसान बैंक के चक्कर काटते थे कि उनका पैसा कहां अटक गया है।

पंजीयन के लिए कहां जाएं और कितनी लगेगी फीस

किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पंजीकरण के लिए दो अलग-अलग श्रेणियां बनाई हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपका पंजीकरण पूरी तरह से नि:शुल्क हो, तो आप अपनी ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालय या स्थानीय सहकारी समितियों में जा सकते हैं। इन जगहों पर सरकार की ओर से नियुक्त अधिकारी मुफ्त में आपका डेटा पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

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वहीं, जो किसान अपने नजदीकी बाजार या शहर से पंजीकरण कराना चाहते हैं, उनके लिए एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी), लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे की सुविधा भी उपलब्ध है। हालांकि, इन निजी केंद्रों पर आपको थोड़ी सी फीस देनी होगी। सरकार ने इन केंद्रों के लिए अधिकतम 50 रुपये का शुल्क निर्धारित किया है। 50 रुपये से अधिक शुल्क लेना गैरकानूनी होगा, इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे निर्धारित राशि से अधिक का भुगतान न करें।

सावधान रहें इन बैंक खातों में नहीं आएगा पैसा

डिजिटल इंडिया के इस दौर में कई तरह के बैंक खाते चलन में हैं, लेकिन फसल के भुगतान के लिए सरकार ने कुछ स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। भुगतान सीधे उसी बैंक खाते में भेजा जाएगा जो आपके आधार कार्ड से लिंक होगा और जिसका डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) चालू होगा। कुछ विशेष प्रकार के खाते इस प्रक्रिया में मान्य नहीं होंगे।

उदाहरण के लिए, संयुक्त खाते यानी जॉइंट अकाउंट में भुगतान नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, जो खाते लंबे समय से बंद या अनएक्टिव पड़े हैं, उनमें भी पैसा नहीं आएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिनो पेमेंट बैंक, एयरटेल पेमेंट बैंक और पेटीएम जैसे पेमेंट बैंक के खाते भी इस प्रक्रिया के लिए स्वीकार नहीं किए जाएंगे। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे किसी राष्ट्रीयकृत बैंक या सहकारी बैंक के चालू या बचत खाते का ही उपयोग करें। यदि आपका मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं है, तो उसे तुरंत पोस्ट ऑफिस या बैंक जाकर अपडेट करवाएं, क्योंकि बिना ओटीपी के पंजीकरण संभव नहीं होगा।

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पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेजों की सूची

जब आप पंजीकरण केंद्र पर जाएं, तो कुछ जरूरी कागजात अपने साथ जरूर रखें ताकि आपको बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें। सबसे पहले तो आपका मूल आधार कार्ड अनिवार्य है। इसके साथ ही वह मोबाइल फोन भी पास रखें जिसका नंबर आधार में रजिस्टर है, क्योंकि उसी पर वेरिफिकेशन के लिए ओटीपी भेजा जाएगा। जमीन की पहचान के लिए खसरा-खतौनी की नकल साथ ले जाना न भूलें।

जो किसान बटाई पर खेती करते हैं या जिन्होंने जमीन ठेके पर ली है, उनके लिए सिकमी या बटाईदार अनुबंध पत्र होना जरूरी है। वहीं, वन पट्टाधारी किसानों को अपना पट्टा प्रमाण पत्र दिखाना होगा। अपनी बैंक पासबुक की एक फोटोकॉपी भी रखें जिसमें आपका नाम, खाता संख्या और आईएफएससी कोड साफ-साफ दिख रहा हो। पहचान पत्र के तौर पर आप अपना वोटर आईडी कार्ड भी साथ रख सकते हैं।

किसानों के लिए जरूरी सलाह

खेती-किसानी के इस व्यस्त समय में अक्सर किसान दस्तावेजों की अनदेखी कर देते हैं, जो बाद में भारी पड़ती है। 7 फरवरी से पहले एक बार अपने सभी कागजात जांच लें। अगर आधार और बैंक खाते में नाम की स्पेलिंग में अंतर है, तो उसे अभी ठीक करा लें।

अपने बैंक जाकर यह जरूर पूछें कि आपका खाता डीबीटी के लिए सक्षम है या नहीं। यह छोटी-सी सतर्कता आपको फसल बेचने के बाद होने वाली बड़ी मानसिक और आर्थिक परेशानी से बचा सकती है। इस बार 3186 केंद्र बनाए गए हैं, इसलिए भीड़भाड़ से बचने के लिए शुरुआती दिनों में ही अपना पंजीकरण करा लेना एक समझदारी भरा फैसला होगा।

Alok Singh

मेरा नाम आलोक सिंह है मैं भगवान नरसिंह की नगरी नरसिंहपुर से हूं ।और पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में आया था ।मुझे पत्रकारिता मैं इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का 20 वर्ष का अनुभव है खबरों को प्रमाणिकता के साथ लिखने के हुनर में माहिर हूं।

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