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मोहन यादव कैबिनेट का मास्टरस्ट्रोक: नर्मदा विस्थापितों को मिला हक, कर्मचारियों की नौकरी पक्की

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आदिवासियों के लिए मुफ्त रजिस्ट्री, रीवा-कटनी में नई सिंचाई योजनाओं और समाज कल्याण बोर्ड के कर्मचारियों के सरकारी विभाग में विलय को मंजूरी दी गई।

Madhya Pradesh News : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार, 3 फरवरी 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास और आम आदमी की सहूलियत से जुड़े कई बड़े प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु वे लोग रहे जो लंबे समय से सरकारी राहत की उम्मीद लगाए बैठे थे। सरकार ने आदिवासियों के हक, किसानों की समृद्धि और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे फैसले लिए हैं जिनका असर प्रदेश की जमीनी राजनीति और अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक दिखाई देगा।

विस्थापित आदिवासियों को मिला मालिकाना हक

नर्मदा नदी पर बनी सरदार सरोवर परियोजना के कारण जिन आदिवासी परिवारों को अपनी पुश्तैनी जमीन और घर छोड़ने पड़े थे, उनके लिए सरकार ने एक बेहद संवेदनशील फैसला लिया है। अब इन विस्थापित परिवारों को मिले आवासीय पट्टों की रजिस्ट्री का पूरा खर्च राज्य सरकार खुद उठाएगी।

धार, बड़वानी, अलीराजपुर और खरगोन जैसे जिलों में रहने वाले करीब 25 हजार 602 आदिवासी परिवारों को अब अपने घर के कानूनी कागजात बनवाने के लिए दफ्तरों के चक्कर या अपनी जेब से मोटी फीस देने की जरूरत नहीं होगी।

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यह कदम इसलिए भी खास है क्योंकि यह परियोजना क्षेत्र कई ऐसी विधानसभाओं में फैला है जहां विपक्ष का प्रभाव है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लाभ देने के मामले में किसी भी तरह का राजनीतिक भेदभाव नहीं किया जाएगा। जमीन का कानूनी अधिकार मिलने से ये परिवार अब न केवल अपने घरों के मालिक बन सकेंगे, बल्कि भविष्य में बैंक लोन या अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी आसानी से उठा पाएंगे।

खेती की तस्वीर बदलेंगी रीवा और कटनी की सिंचाई योजनाएं

मध्य प्रदेश को कृषि क्षेत्र में अग्रणी बनाए रखने के लिए कैबिनेट ने दो बड़ी सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं (Micro Irrigation Projects) को मंजूरी दी है। रीवा जिले में बाणसागर बांध परियोजना के तहत धनवाही क्षेत्र के लिए करीब 53.73 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे लगभग 3500 हेक्टेयर सूखी जमीन तक पानी पहुंचेगा। सूक्ष्म सिंचाई तकनीक के इस्तेमाल से कम पानी में बेहतर फसल पैदा करना संभव होगा, जिससे इलाके के छोटे किसानों की आय में सुधार होगा।

वहीं कटनी जिले की विजयराघवगढ़ तहसील के लिए तो सरकार ने खजाना ही खोल दिया है। यहाँ बरही सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 566.92 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी गई है। इस बड़ी योजना से लगभग 11,500 किसान परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। सिंचाई की स्थायी सुविधा मिलने से किसानों की मानसून पर निर्भरता कम होगी और वे साल में एक से ज्यादा फसलें ले सकेंगे, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा निवेश है।

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सरकारी कर्मचारियों के भविष्य पर लगी मुहर

प्रशासनिक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सरकार ने राज्य समाज कल्याण बोर्ड को लेकर भी बड़ा निर्णय लिया है। बोर्ड को अब भंग कर दिया गया है, लेकिन वहां काम कर रहे कर्मचारियों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। सरकार ने इन सभी कर्मचारियों का संविलियन महिला एवं बाल विकास विभाग में करने का फैसला किया है।

इस विलय का मतलब यह है कि ये कर्मचारी अब मुख्य सरकारी विभाग का हिस्सा होंगे, जिससे उनकी नौकरी न केवल सुरक्षित रहेगी बल्कि उन्हें मिलने वाली सुविधाएं और करियर की संभावनाएं भी बेहतर होंगी। यह फैसला सरकारी मशीनरी को और अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश का हिस्सा है।

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Alok Singh

मेरा नाम आलोक सिंह है मैं भगवान नरसिंह की नगरी नरसिंहपुर से हूं ।और पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में आया था ।मुझे पत्रकारिता मैं इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का 20 वर्ष का अनुभव है खबरों को प्रमाणिकता के साथ लिखने के हुनर में माहिर हूं।

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