MP Weather News : मध्य प्रदेश के 20 जिलों में कोहरे का ‘रेड अलर्ट’, जानें आपके शहर का हाल
मध्य प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से 20 जिलों में घना कोहरा और भोपाल में सर्द हवाएं चल रही हैं। 5 फरवरी से नया सिस्टम बारिश और मावठा लेकर आएगा।
मध्य प्रदेश में इन दिनों कुदरत के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। कहीं आसमान से ओले गिर रहे हैं तो कहीं घने कोहरे ने दिन में ही अंधेरा कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के कई हिस्सों में हुई बारिश और ओलावृष्टि के बाद अब कड़ाके की ठंड और धुंध का नया दौर शुरू हो गया है।
भोपाल से लेकर ग्वालियर और रीवा तक पूरा प्रदेश इस समय सफेद चादर में लिपटा हुआ नजर आ रहा है। यह सब कुछ एक खास मौसमी सिस्टम की वजह से हो रहा है जिसे वैज्ञानिक भाषा में पश्चिमी विक्षोभ कहा जाता है। आने वाले कुछ दिन प्रदेशवासियों के लिए थोड़े और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं क्योंकि मौसम विभाग ने एक और नए सिस्टम के सक्रिय होने की चेतावनी दी है।
मध्य प्रदेश के 20 जिलों में कोहरे का जबरदस्त पहरा
बुधवार की सुबह जब मध्य प्रदेश के लोग सोकर उठे तो नजारा बिल्कुल बदला हुआ था। प्रदेश के लगभग 20 जिले ऐसे थे जहां कोहरा इतना घना था कि घर से बाहर निकलना भी दूभर हो गया। ग्वालियर-चंबल संभाग के साथ-साथ बुंदेलखंड और विंध्य के इलाकों में विजिबिलिटी बहुत कम दर्ज की गई।
रीवा जैसे शहरों में तो हालात यह थे कि मात्र 100 मीटर की दूरी पर क्या है यह देख पाना भी संभव नहीं था। सड़कों पर चलने वाले वाहनों की रफ्तार पूरी तरह थम गई और ड्राइवरों को दिन के उजाले में भी अपनी गाड़ियों की हेडलाइट और फॉग लाइट जलानी पड़ी। इस तरह की धुंध न केवल यातायात को प्रभावित करती है बल्कि आम जनजीवन की गति को भी काफी धीमा कर देती है।
भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी सुबह के समय मध्यम से घना कोहरा देखा गया। कोहरे के साथ-साथ चलने वाली ठंडी हवाओं ने वातावरण में नमी बढ़ा दी है जिससे सुबह और शाम की ठिठुरन काफी ज्यादा महसूस की जा रही है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि जब हवा में नमी की मात्रा 90 प्रतिशत से ज्यादा हो जाती है और तापमान अचानक गिरता है तो कोहरे की ऐसी स्थिति पैदा होती है। फिलहाल ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया और शिवपुरी जैसे इलाकों में कोहरे का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है।
भोपाल में सर्द हवाओं का सितम और गिरता पारा
राजधानी भोपाल की बात करें तो यहां पिछले 24 घंटों में भले ही बारिश नहीं हुई है लेकिन ठंडी हवाओं ने लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है। मंगलवार को हुई हल्की बूंदाबांदी और ओलावृष्टि ने शहर के वातावरण को पूरी तरह ठंडा कर दिया है। बुधवार सुबह से ही चल रही सर्द हवाओं के कारण दिन के तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है।
भोपाल के आसपास के इलाकों जैसे विदिशा, रायसेन और सीहोर में भी कोहरे की वजह से सुबह की शुरुआत काफी देरी से हुई। मौसम विभाग के अनुसार यह हवाएं हिमालय की ओर से आ रही हैं जहां हाल ही में बर्फबारी हुई है। यही वजह है कि मैदानी इलाकों में पहुंचने तक यह हवाएं काफी बर्फीली हो जाती हैं और यहां की ठंड को और भी ज्यादा बढ़ा देती हैं।
पश्चिमी विक्षोभ और मावठा का विज्ञान
आम जनता के मन में यह सवाल अक्सर उठता है कि आखिर फरवरी के महीने में यह बेमौसम बारिश और ओले क्यों गिर रहे हैं। इसका मुख्य कारण है ‘वेस्टर्न डिस्टरबेंस’ या पश्चिमी विक्षोभ। यह हवाओं का एक ऐसा चक्रवात होता है जो भूमध्य सागर से उठता है और पाकिस्तान के रास्ते भारत के उत्तरी और मध्य हिस्सों में पहुंचता है। जब यह सिस्टम मध्य प्रदेश के ऊपर से गुजरता है तो यहां की नमी वाली हवाओं से मिलकर बारिश और ओलावृष्टि पैदा करता है।
सर्दियों में होने वाली इस बारिश को मध्य प्रदेश की स्थानीय भाषा में ‘मावठा’ कहा जाता है। मावठा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रबी की फसलों जैसे गेहूं और चने के लिए संजीवनी का काम करती है। लेकिन अगर यह बारिश जरूरत से ज्यादा हो जाए या इसके साथ ओले गिरने लगें तो यही अमृत फसलों के लिए जहर भी बन सकता है। मंगलवार को प्रदेश के कई जिलों में हुई ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आई हैं।
किसानों की चिंता और फसलों पर असर
मध्य प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है और मौसम का हर छोटा बदलाव यहां के किसानों की धड़कनें बढ़ा देता है। वर्तमान में हो रही बारिश वैसे तो गेहूं के दाने को चमक और मजबूती देती है लेकिन लंबे समय तक बने रहने वाले कोहरे ने अब किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोहरा अगले तीन-चार दिनों तक इसी तरह बना रहता है और धूप नहीं निकलती है तो फसलों में फफूंद यानी फंगस लगने का खतरा पैदा हो सकता है। खासकर चने और सरसों की फसल में इस तरह के मौसम से रोग लगने की संभावना काफी ज्यादा रहती है। साथ ही कोहरे के कारण कीटों का हमला भी तेज हो जाता है जिससे पैदावार कम होने का डर रहता है। किसान अब ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि जल्द से जल्द मौसम साफ हो और अच्छी धूप खिले ताकि उनकी मेहनत बर्बाद न हो।
कल से फिर शुरू होगा मौसम का नया दौर
मध्य प्रदेश के लोगों को लगा था कि बुधवार से मौसम साफ हो जाएगा लेकिन मौसम विभाग ने एक और नई चेतावनी जारी कर दी है। 5 फरवरी से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहा है जो पिछले सिस्टम से भी ज्यादा प्रभावशाली हो सकता है।
इस नए सिस्टम के असर से 5 फरवरी की रात से मौसम एक बार फिर करवट लेगा और 10 फरवरी तक प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। इसका मतलब है कि ठंड से अभी राहत मिलने वाली नहीं है। आने वाले 48 घंटों में ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड के जिलों में कोहरे का रेड अलर्ट जारी किया गया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे सुबह के समय सड़क पर वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें।
अगले 48 घंटों का पूरा हाल
आने वाले दो दिनों की बात करें तो गुरुवार यानी 6 फरवरी को कोहरे के घनत्व में थोड़ी कमी आने की उम्मीद है लेकिन यह राहत बहुत कम समय के लिए होगी। 5 फरवरी को मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जैसे जिलों में कोहरा अपनी चरम सीमा पर रहेगा। इसके बाद 6 तारीख को आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं













