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नरसिंहपुर आरटीओ में ‘पप्पू-पटेल’ का राज: बिना इनकी मर्जी नहीं हिलती दफ्तर की कोई फाइल

नरसिंहपुर परिवहन कार्यालय में भ्रष्टाचार और दलाली का बोलबाला बढ़ गया है, जहां पप्पू और पटेल नामक दो व्यक्तियों के इशारों पर पूरा सिस्टम चल रहा है और हर काम के दाम तय हैं।

Narsinghpur RTO News : मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के परिवहन कार्यालय को लेकर इन दिनों कई तरह की चर्चाएँ सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह बात तेजी से फैल रही है कि आरटीओ दफ्तर के कामकाज में दो नाम “पप्पू” और “पटेल” लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। बताया जा रहा है कि जब से जिले में नए परिवहन अधिकारी ने पदभार संभाला है, तब से इन दोनों व्यक्तियों की सक्रियता कार्यालय के भीतर और बाहर काफी बढ़ गई है।

लोगों के बीच यह धारणा बनती जा रही है कि दफ्तर के कई काम इनके माध्यम से ही आगे बढ़ते हैं। हालांकि इस तरह की चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों और वाहन मालिकों के बीच इन नामों का जिक्र बार-बार सुनाई दे रहा है। इससे परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।

आरटीओ कार्यालय की भूमिका और बढ़ती निर्भरता

परिवहन विभाग किसी भी जिले के प्रशासनिक ढांचे का अहम हिस्सा होता है। ड्राइविंग लाइसेंस जारी करना, वाहन पंजीकरण, परमिट, फिटनेस सर्टिफिकेट और टैक्स से जुड़े कई काम इसी दफ्तर के माध्यम से पूरे होते हैं। आम तौर पर इन सेवाओं के लिए सरकार ने ऑनलाइन व्यवस्था और निर्धारित फीस तय कर रखी है ताकि लोगों को सीधे और पारदर्शी तरीके से सुविधा मिल सके।

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लेकिन नरसिंहपुर में लोगों का कहना है कि व्यवहार में यह प्रक्रिया इतनी सरल नहीं है। कई वाहन मालिकों और आवेदकों का आरोप है कि बिना किसी मध्यस्थ के काम कराना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में लोग दलालों या बिचौलियों की मदद लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

‘पप्पू’ और ‘पटेल’ का नाम क्यों आ रहा सामने

स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, आरटीओ दफ्तर में जिन दलालों की सक्रियता बताई जा रही है, उनमें दो नाम सबसे अधिक सुनाई देते हैं पप्पू और पटेल। दावा किया जा रहा है कि कई लोग इन्हें परिवहन अधिकारी के करीब मानते हैं। यही वजह है कि कार्यालय से जुड़े कई काम इनके माध्यम से करवाने की बात कही जाती है।

सूत्रों का कहना है कि दफ्तर के बाहर और आसपास सक्रिय कुछ बिचौलिए अक्सर लोगों को बताते हैं कि यदि लाइसेंस, वाहन ट्रांसफर, परमिट या अन्य काम जल्दी करवाना है तो इनसे संपर्क करना पड़ता है। इस तरह की बातें क्षेत्र में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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कथित ‘रेट लिस्ट’ की भी चर्चा

कुछ वाहन मालिकों का यह भी कहना है कि विभिन्न सेवाओं के लिए अनौपचारिक रूप से अलग-अलग रकम तय होने की बात कही जाती है। लोगों के बीच यह चर्चा है कि ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर अन्य परिवहन संबंधी कामों तक के लिए एक तरह की “रेट लिस्ट” चलती है।

हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई आवेदकों का अनुभव यह रहा है कि यदि वे सीधे प्रक्रिया अपनाते हैं तो काम में अधिक समय लगता है, जबकि बिचौलियों के माध्यम से काम जल्दी होने की बात कही जाती है। इसी कारण लोग मजबूरी में इस रास्ते को अपनाने की कोशिश करते हैं।

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Alok Singh

मेरा नाम आलोक सिंह है मैं भगवान नरसिंह की नगरी नरसिंहपुर से हूं ।और पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में आया था ।मुझे पत्रकारिता मैं इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का 20 वर्ष का अनुभव है खबरों को प्रमाणिकता के साथ लिखने के हुनर में माहिर हूं।

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