अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: नरसिंहपुर की डॉ. शारदा नागवंशी ने नर्सिंग शिक्षा में बनाई पहचान
शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय की प्राचार्य के रूप में दो वर्षों से निभा रहीं जिम्मेदारी, 60 छात्राओं के पहले बैच के साथ संस्थान को दे रहीं नई दिशा
Narsinghpur Nursing College ; नरसिंहपुर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिले की ऐसी महिला शख्सियत पर नजर डालना जरूरी है, जिन्होंने अपने कार्य और नेतृत्व से स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में अलग पहचान बनाई है। नरसिंहपुर के शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय प्रशिक्षण केंद्र की प्राचार्य डॉ. शारदा नागवंशी पिछले दो वर्षों से संस्थान का नेतृत्व कर रही हैं।
उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक क्षमता के कारण कॉलेज का संचालन व्यवस्थित तरीके से हो रहा है और स्थानीय स्तर पर नर्सिंग शिक्षा को मजबूती मिली है। डॉ. नागवंशी का जन्म 4 अप्रैल 1964 को हुआ था और वे मूल रूप से पचमढ़ी की निवासी हैं। लंबे समय तक स्वास्थ्य शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र में काम करने के बाद अब वे नरसिंहपुर जिले में नर्सिंग शिक्षा को आगे बढ़ाने का दायित्व निभा रही हैं।
स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़ा लंबा अनुभव
डॉ. शारदा नागवंशी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद चिकित्सा क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने एचडी गायनिक से संबंधित अध्ययन किया और विभिन्न जगह सेवा दी। वर्षों के अनुभव ने उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशिक्षण दोनों क्षेत्रों में मजबूत समझ दी।
इसी अनुभव के आधार पर उन्हें नरसिंहपुर के शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय में प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई। पिछले दो वर्षों में उन्होंने कॉलेज की प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने, शिक्षण गुणवत्ता सुधारने और छात्राओं के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया है।
स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, कॉलेज की गतिविधियों और प्रशिक्षण व्यवस्था को लेकर उनकी कार्यशैली संतुलित और प्रभावी रही है।
नरसिंहपुर के नर्सिंग कॉलेज को मिली नई दिशा
नरसिंहपुर का शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय जिले में स्वास्थ्य शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण संस्थान के रूप में विकसित हो रहा है। फिलहाल कॉलेज के पहले बैच में 60 छात्राएं नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हैं।
यह बैच भविष्य में जिले और आसपास के क्षेत्रों के अस्पतालों में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की जरूरत पूरी करने में मदद करेगा। नर्सिंग शिक्षा स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा मानी जाती है, क्योंकि अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और प्राथमिक चिकित्सा में नर्सों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। डॉ. नागवंशी के नेतृत्व में कॉलेज में पढ़ाई, प्रशिक्षण और अनुशासन से जुड़े कई पहलुओं पर नियमित निगरानी रखी जा रही है।
महिला स्टाफ की टीम के साथ संस्थान का संचालन
शासकीय नर्सिंग महाविद्यालय में फिलहाल शिक्षकों और अन्य स्टाफ सहित 18 महिलाएं कार्यरत हैं। यह पूरी टीम संस्थान की शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों को संभाल रही है।

कॉलेज के संचालन में वाइस प्रिंसिपल नीलम राजपूत भी अहम भूमिका निभा रही हैं। प्राचार्य और वाइस प्राचार्य के समन्वय से कॉलेज की पढ़ाई, प्रशिक्षण कार्यक्रम और दैनिक प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं।
महिला नेतृत्व और टीमवर्क के इस मॉडल को कई लोग सकारात्मक उदाहरण के रूप में देख रहे हैं, खासकर ऐसे समय में जब स्वास्थ्य शिक्षा में प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की मांग लगातार बढ़ रही है।
परिवार और पेशे के बीच संतुलन
डॉ. शारदा नागवंशी का व्यक्तिगत जीवन भी उतना ही संतुलित रहा है। उनके पति भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं और वर्तमान में जबलपुर स्थित हाईकोर्ट में एएफटी से जुड़े कार्यों में लगे हैं।
उनके परिवार में दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा विदेश में नौकरी कर रहा है, जबकि उनकी बेटी भी अपने क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। डॉ. नागवंशी का कहना है कि परिवार के सहयोग के बिना लंबे समय तक जिम्मेदार पदों पर काम करना आसान नहीं होता।
महिला दिवस पर प्रेरक उदाहरण
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर डॉ. शारदा नागवंशी जैसी महिलाएं उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं जो स्वास्थ्य शिक्षा और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं।
नरसिंहपुर में नर्सिंग शिक्षा को मजबूत करने के लिए उनका काम स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशिक्षित नर्सिंग पेशेवर तैयार करना न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाता है बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है। आने वाले समय में कॉलेज के नए बैच और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से इस संस्थान की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है।













