Gun License Rules 2026 : डिजिटल होगा हथियारों का रिकॉर्ड, ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज होगी कारतूसों की जानकारी
गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइन के तहत शस्त्र लाइसेंस की पूरी प्रक्रिया हुई डिजिटल; अब ऑफलाइन फाइलों का दौर खत्म, पारदर्शिता पर जोर।
Gun License Rules 2026 : भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने देश में हथियारों के लाइसेंस की व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नियमों में आमूलचूल बदलाव किए हैं। मध्य प्रदेश में अब नए गन लाइसेंस बनवाने, पुराने का नवीनीकरण (रिन्यूअल) कराने या शस्त्र ट्रांसफर करने के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार किए जाएंगे।
अब तक चली आ रही ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत आवेदकों को भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल ndal-alis.gov.in पर जाकर अपनी आईडी बनानी होगी। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य शस्त्रों के रिकॉर्ड को ट्रैक करना और लाइसेंस प्रक्रिया में होने वाली मानवीय चूक या धांधली को रोकना है।
डिजिटल इंडिया की ओर कदम अब पोर्टल से मिलेगी अनुमति
शस्त्र लाइसेंस से जुड़ी सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब कलेक्ट्रेट या पुलिस कार्यालयों में भौतिक रूप से फाइलें जमा नहीं होंगी। आवेदक स्वयं या एमपी ऑनलाइन के माध्यम से पोर्टल पर लॉगिन कर आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन जमा होते ही इसकी सूचना संबंधित क्षेत्र के एसडीएम और पुलिस अधिकारियों को डिजिटल माध्यम से भेज दी जाएगी। इससे समय की बचत होगी और आवेदक को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वर्तमान में प्रशासन उन पुराने रिकॉर्ड्स को भी पोर्टल पर अपलोड कर रहा है जो अब तक केवल कागजों में दर्ज थे।
घर पहुँचकर जाँच करेगी टीम, पड़ोसियों से भी होगी पूछताछ
नए नियमों में सुरक्षा मानकों को और कड़ा किया गया है। अब केवल दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस जारी नहीं होगा। आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रशासन की एक विशेष टीम आवेदक के घर जाकर पते का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करेगी।
इस प्रक्रिया के दौरान टीम न केवल आवेदक के रहने के स्थान की पुष्टि करेगी, बल्कि उसके चाल-चलन और व्यवहार के बारे में आसपास के पड़ोसियों के बयान भी दर्ज करेगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हथियार किसी ऐसे व्यक्ति के हाथ में न जाए जिसका सामाजिक आचरण संदिग्ध हो।
रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और कारतूसों पर नजर
जिले में मौजूद हजारों शस्त्र लाइसेंसों का डेटा फिलहाल मैनुअल रजिस्टरों में दर्ज है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि लाइसेंसधारी साल भर में कितने कारतूस खरीद रहे हैं या उन्होंने अपने हथियार में कोई बदलाव तो नहीं किया है, इसका सटीक हिसाब रखना मुश्किल होता था।
नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने से प्रत्येक शस्त्र की यूनिक आईडी बनेगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किसी व्यक्ति ने कब बंदूक खरीदी, उसका सीरियल नंबर क्या है और उसके पास कारतूसों का कितना स्टॉक मौजूद है। इससे हथियारों के अवैध हस्तांतरण पर भी लगाम लगेगी।
पारदर्शिता से खत्म होगी फाइलों की हेराफेरी
अक्सर यह शिकायतें आती थीं कि लाइसेंस की फाइलें कार्यालयों में दब जाती हैं या रिकॉर्ड गुम हो जाते हैं। ऑनलाइन सिस्टम आने से जवाबदेही तय होगी। जांच पूरी होने के बाद पुलिस अपनी रिपोर्ट सीधे पोर्टल पर अपलोड करेगी।
इसके बाद अंतिम निर्णय कलेक्टर द्वारा लिया जाएगा। डिजिटल ट्रैकिंग के कारण अब अधिकारी भी आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रख पाएंगे। सरकार का मानना है कि इस सिस्टम से भ्रष्टाचार में कमी आएगी और केवल पात्र व्यक्तियों को ही आत्मरक्षा के लिए लाइसेंस मिल सकेगा।
पुरानी जानकारी अपडेट करना अनिवार्य
प्रशासन ने उन लाइसेंसधारियों को भी सूचित किया है जिनके रिकॉर्ड अभी तक ऑनलाइन नहीं हुए हैं। कई मामलों में लाइसेंस तो वैध हैं लेकिन शस्त्र की खरीद-बिक्री या मरम्मत की जानकारी पोर्टल पर दर्ज नहीं है।
ऐसे सभी शस्त्र धारकों को अपना डेटा अपडेट कराना होगा ताकि भविष्य में रिन्यूअल के समय उन्हें तकनीकी दिक्कतों का सामना न करना पड़े। नई व्यवस्था लागू होने से अब शस्त्र लाइसेंस की पूरी कुंडली एक क्लिक पर उपलब्ध होगी, जिससे कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस को भी मदद मिलेगी।













