पुलिस की काली करतूत: सुसाइड केस में फंसाने की धमकी देकर ज्वेलर्स से मांगी रिश्वत, लोकायुक्त ने दबोचा
बड़वानी के अंजड़ में लोकायुक्त ने रिश्वतखोर सब-इंस्पेक्टर और आरक्षक पर बड़ी कार्रवाई की है। पुराने सुसाइड केस में फंसाने की धमकी देकर ज्वेलर्स संचालक से 50 हजार रुपये की मांग की गई थी।
Indore Lokayukta action ; मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां के अंजड़ थाने में तैनात एक सब-इंस्पेक्टर और एक आरक्षक पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके बाद इंदौर लोकायुक्त की टीम ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है।
यह पूरा मामला एक स्थानीय ज्वेलर्स संचालक को डराने-धमकाने और उससे अवैध वसूली करने से जुड़ा है। जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में आ जाएं, तो आम जनता का कानून पर से भरोसा डगमगाने लगता है और यह मामला इसी कड़वी सच्चाई को बयां करता है।
बड़वानी जिले के अंजड़ थाना क्षेत्र में रहने वाले जयराज चौधरी, जो डायमंड ज्वेलर्स के नाम से अपना व्यवसाय चलाते हैं, पिछले कुछ समय से मानसिक दबाव में थे। उन्हें यह दबाव किसी अपराधी से नहीं, बल्कि कानून के रखवालों की ओर से मिल रहा था।
दरअसल, यह पूरा विवाद करीब एक साल पुराने एक सुसाइड केस को लेकर शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि लगभग एक वर्ष पहले भारत बर्फा नामक व्यक्ति ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी। पुलिस इस मामले की जांच कर रही थी और इसी जांच की आड़ में भ्रष्टाचार का यह पूरा ताना-बाना बुना गया।
अंजड़ थाने में पदस्थ सब-इंस्पेक्टर महावीर सिंह चंदेल ने इस पुराने सुसाइड केस की फाइल को दोबारा खंगाला और ज्वेलर्स संचालक जयराज चौधरी को पूछताछ के बहाने थाने बुलाया। जयराज का कसूर बस इतना था कि उनका नाम उस पुराने मामले के आस-पास कहीं चर्चा में आया था, लेकिन पुलिस जांच में उन्हें कभी आरोपी नहीं बनाया गया था।
सब-इंस्पेक्टर चंदेल ने जयराज पर दबाव बनाना शुरू किया और उन्हें यह कहकर डराया कि इस केस में उनका नाम आसानी से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने जयराज को क्लीन चिट देने और भविष्य में परेशान न करने के बदले में ‘खर्चा-पानी’ के तौर पर 50,000 रुपये की मांग रख दी।
भ्रष्टाचार के इस खेल में सब-इंस्पेक्टर खुद सीधे तौर पर पैसे नहीं ले रहे थे। उन्होंने इसके लिए अपने एक मातहत आरक्षक पवन प्रजापति को माध्यम बनाया। आरक्षक पवन लगातार जयराज के संपर्क में था और उसे डरा रहा था कि अगर पैसे नहीं दिए गए, तो सुसाइड केस में फंसना तय है।
एक आम व्यापारी के लिए पुलिस केस और जेल जाने की धमकी किसी बुरे सपने से कम नहीं होती। जयराज चौधरी ने हार मानने के बजाय हिम्मत दिखाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया। उन्होंने इंदौर लोकायुक्त एसपी से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी।
लोकायुक्त की टीम ने शिकायत मिलते ही सबसे पहले इसका गुप्त रूप से सत्यापन किया। जब टीम को विश्वास हो गया कि रिश्वत की मांग वास्तव में की जा रही है, तो उन्होंने आरक्षक और सब-इंस्पेक्टर को रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक जाल बिछाया। तय योजना के मुताबिक, जयराज चौधरी रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 15,000 रुपये लेकर आरक्षक पवन प्रजापति के पास पहुंचे।
जैसे ही आरक्षक ने यह रकम अपने हाथ में ली, पहले से ही तैयार बैठी लोकायुक्त की टीम ने उसे दबोच लिया। आरक्षक के पास से बरामद नोटों पर लोकायुक्त द्वारा लगाया गया विशेष पाउडर लगा था, जिससे यह साबित हो गया कि उसने रिश्वत ली है।
इस कार्रवाई के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। लोकायुक्त पुलिस ने न केवल मौके से आरक्षक को पकड़ा, बल्कि इस पूरी साजिश के मुख्य सूत्रधार सब-इंस्पेक्टर महावीर सिंह चंदेल को भी आरोपी बनाया है।
दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 के साथ-साथ नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई डीएसपी सुनील तालान के नेतृत्व में की गई, जिसमें विजय कुमार, आशीष नायडू और अन्य पुलिसकर्मियों की टीम शामिल थी।













