हनुमान चालीसा से मिला आत्मविश्वास? बागेश्वर महाराज ने सुनाया कैप्टन स्मिथ का किस्सा
Bageshwar Maharaj News : छतरपुर में आयोजित दिव्य दरबार के दौरान बागेश्वर महाराज ने हनुमान चालीसा और आत्मविश्वास के संबंध को लेकर एक प्रसंग सुनाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैप्टन स्मिथ के बीच हुई वीडियो कॉल पर बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि विमान के संकट में फंसने के दौरान कैप्टन स्मिथ ने हनुमान चालीसा का पाठ किया था।
बागेश्वर महाराज के मुताबिक, उस समय विमान में 100 से ज्यादा लोग सवार थे और स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। उन्होंने बताया कि विमान के नीचे गिरने की स्थिति में दोनों कप्तानों के बीच विवाद की स्थिति भी बनी थी। इसी प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए बागेश्वर महाराज ने कहा कि कैप्टन स्मिथ ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना विमान को संभालने का प्रयास किया और यात्रियों की जान बचाने में सफल रहे।
प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत का किया जिक्र
बागेश्वर महाराज ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैप्टन स्मिथ के बीच हुई वीडियो कॉल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने कैप्टन स्मिथ से पूछा कि मुश्किल परिस्थिति में विमान को नियंत्रित करने का आत्मविश्वास उन्हें कैसे मिला। बागेश्वर महाराज के अनुसार, कैप्टन स्मिथ ने जवाब में बताया कि जब विमान नीचे गिरने लगा था, तब उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया था।
'हनुमान चालीसा से मिला आत्मविश्वास'
बागेश्वर महाराज ने कहा कि कैप्टन स्मिथ ने हनुमान चालीसा के पाठ को अपने आत्मविश्वास से जोड़ा। उनके मुताबिक, इसी आत्मविश्वास के सहारे कैप्टन ने कठिन परिस्थिति में विमान को नियंत्रित किया और उसमें सवार 100 से अधिक लोगों की जान बचाने में सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि हनुमान जी की भक्ति करने वाले व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास की शक्ति प्रकट होती है।
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— Mp Big News (@mpbignews) October 4, 2026
बागेश्वर महाराज ने बताई भक्ति की शक्ति
दिव्य दरबार में इस प्रसंग के जरिए बागेश्वर महाराज ने हनुमान चालीसा के धार्मिक और मानसिक प्रभाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संकट के समय विश्वास और आत्मविश्वास व्यक्ति को मजबूती दे सकते हैं। हालांकि, कैप्टन स्मिथ, विमान हादसे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बताई गई वीडियो कॉल से जुड़े विवरण इस उपलब्ध स्रोत सामग्री में किसी स्वतंत्र आधिकारिक दस्तावेज या बयान से पुष्ट नहीं किए गए हैं। इसलिए इस प्रसंग को बागेश्वर महाराज द्वारा दिव्य दरबार में सुनाए गए कथन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
