- मध्य प्रदेश कैबिनेट ने नई तबादला नीति 2026 को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
- सूबे में आगामी 1 जून से लेकर 15 जून तक अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले हो सकेंगे।
- कुल 200 कर्मचारियों की संख्या वाले विभागों में अधिकतम 20 फीसदी तक ट्रांसफर की अनुमति होगी।
- 2000 से अधिक कर्मचारी संख्या वाले बड़े महकमों में केवल 5 प्रतिशत ही तबादले किए जा सकेंगे।
- सरकार ने इस बार पूरी ट्रांसफर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन पर जोर दिया है।
MP Government Transfer Policy 2026 Rules : मध्य प्रदेश के
सरकारी गलियारों में ट्रांसफर का इंतजार कर रहे अधिकारी-कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने 'तबादला नीति 2026' को हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के बाद प्रदेश में आगामी 1 जून से 15 जून 2026 तक तबादलों पर लगा प्रतिबंध पूरी तरह हट जाएगा। सरकार ने यह कदम प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और कर्मचारियों की पारिवारिक व स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को ध्यान में रखकर उठाया है। कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री चैतन्य कश्यप ने बताया कि इस बार ट्रांसफर प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन बनाने पर जोर दिया गया है, जिससे किसी भी स्तर पर पक्षपात की गुंजाइश न रहे।
नई ट्रांसफर पॉलिसी 2026 के प्रमुख नियम
कैबिनेट के फैसलों को साझा करते हुए मंत्री चैतन्य कश्यप ने स्पष्ट किया कि
नई तबादला नीति के तहत विभागों में कार्यरत कुल कर्मचारियों की संख्या के आधार पर एक निश्चित कोटा (कैपिंग) तय किया गया है। इसके तहत छोटे विभागों से लेकर बड़े विभागों तक के लिए अलग-अलग स्लैब बनाए गए हैं ताकि कामकाज प्रभावित न हो। नए नियमों के मुताबिक, जिस विभाग में कर्मचारियों की कुल संख्या 200 तक है, वहां अधिकतम 20 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकेंगे। वहीं, 1000 तक की संख्या वाले विभागों में 15 प्रतिशत, 2000 तक की संख्या वाले विभागों में 10 प्रतिशत और जिन बड़े विभागों में 2000 से अधिक कर्मचारी हैं, वहां केवल 5 प्रतिशत ट्रांसफर की ही अनुमति होगी। https://twitter.com/CMMadhyaPradesh/status/2057009544614883750 प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस नीति में गंभीर रूप से बीमार कर्मचारियों, दिव्यांगों और सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके अधिकारियों को गृह जिले या पसंदीदा स्थानों पर प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है।
ऑनलाइन प्रक्रिया और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान
इस बार की ट्रांसफर पॉलिसी में सबसे बड़ा बदलाव इसकी कार्यप्रणाली को लेकर किया गया है। सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि ट्रांसफर के नाम पर किसी भी तरह का भ्रष्टाचार या सिफारिशी दौर न चले। यही वजह है कि डॉ. मोहन यादव सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट करने का निर्देश दिया है। https://twitter.com/DrMohanYadav51/status/2056991287832911890 कर्मचारियों को अपने आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही जमा करने होंगे, जहां उनके दावों और खाली पदों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट दिखाई देगी। इसके अलावा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभागों के लिए विभाग स्तर पर अलग से विशेष गाइडलाइंस भी जारी की जा सकती हैं ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों और अस्पतालों में स्टाफ की कमी न होने पाए। 15 जून के बाद ट्रांसफर पर दोबारा प्रतिबंध लागू हो जाएगा, इसलिए विभाग बेहद सीमित समय में इस पूरी प्रक्रिया को निपटाने की तैयारी में जुट गए हैं।