MP No UPI Day: MDR के विरोध में आज सड़क पर उतरे मध्य प्रदेश के व्यापारी
MP No UPI Day: आज, 23 सितंबर को मध्य प्रदेश के बाजारों में यूपीआई स्कैनर कहीं-कहीं काले कपड़े से ढके नजर आ रहे हैं। भोपाल, इंदौर सहित प्रदेश के कई शहरों के व्यापारियों ने आज ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई भुगतान न लेने का फैसला किया है। इसे 'नो-यूपीआई डे' नाम दिया गया है। यह कदम अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, मध्य प्रदेश के आह्वान पर उठाया गया है।
व्यापारी संगठनों ने साफ किया है कि यह पूरी तरह सांकेतिक और स्वैच्छिक विरोध है किसी दुकानदार पर इसमें शामिल होने का दबाव नहीं बनाया जाएगा। इंदौर में तो 125 से ज्यादा व्यापारिक संगठन इस विरोध में उतरे हैं। असल मुद्दा है 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहा नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR, जो बड़े यूपीआई भुगतानों पर व्यापारियों की जेब पर सीधा असर डालने वाला है। आगे जानिए पूरा मामला किस पर पड़ेगा असर, किस पर नहीं, और पेट्रोल पंप वाले क्यों पहले से ही सख्त रुख अपना चुके हैं।
आखिर MDR है क्या और नया नियम कहता क्या है
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले दुकानदार से काटा जाता है। नई व्यवस्था के तहत ग्राहक से दुकानदार को होने वाले (P2M) ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर 0.4% MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ट्रांजैक्शन ₹300 तय की गई है।
यानी ₹10,000 के भुगतान पर करीब ₹40 का MDR बनेगा। जरूरी बात यह है कि यह चार्ज ग्राहक से नहीं, दुकानदार से वसूला जाएगा वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि ग्राहकों से यह शुल्क लेने की इजाजत नहीं होगी।
हर लेन-देन पर चार्ज नहीं लगेगा
आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि दोस्तों-रिश्तेदारों के बीच होने वाले पर्सन-टू-पर्सन ट्रांसफर पहले की तरह मुफ्त रहेंगे। ₹2,000 तक के दुकान भुगतान पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा, और छोटे व्यापारियों के लिए जीरो-MDR व्यवस्था बनी रहेगी।
यहां तक कि जिन व्यापारियों पर नया नियम लागू भी होता है, उनका महीने के ₹1 लाख तक का P2M कारोबार भी शुल्क से मुक्त रहेगा MDR सिर्फ इससे ऊपर के हिस्से पर लगेगा। वित्त मंत्रालय के मुताबिक करीब 96% ग्राहक-से-व्यापारी यूपीआई लेन-देन इस बदलाव से अछूते रहेंगे।
फिर व्यापारी नाराज
व्यापारी संगठनों की दलील है कि अब तक यूपीआई पूरी तरह मुफ्त होने के कारण डिजिटल भुगतान कारोबार के लिए सुविधाजनक बना हुआ था। बड़े भुगतानों पर अब शुल्क जुड़ने से पहले से पतले मार्जिन पर असर पड़ना तय है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय वित्त मंत्री और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर जीरो-MDR व्यवस्था बनाए रखने की मांग की है। उनका कहना है कि व्यापारी यूपीआई के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि यह और मजबूत बने सिर्फ पात्र भुगतानों पर शुल्क न जोड़ा जाए।
पेट्रोल पंप वालों ने पहले ही उठा लिया कदम
मध्य प्रदेश पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन ने विरोध को एक कदम आगे बढ़ाते हुए ऐलान कर दिया है कि 16 अक्टूबर से वे ₹2,000 से ज्यादा के बिल पर यूपीआई भुगतान स्वीकार ही नहीं करेंगे। एसोसिएशन अध्यक्ष अजय सिंह के अनुसार, प्रदेश में कुल 4,700 पेट्रोल पंप हैं। हर ₹2,000 के भुगतान पर करीब ₹5.90 का MDR बनेगा, और एक पंप पर औसतन रोजाना ऐसे 100 ट्रांजेक्शन होते हैं यानी रोज करीब ₹590 और महीने में लगभग ₹17,400 का अतिरिक्त बोझ हर पंप संचालक पर पड़ेगा।
सभी 4,700 पंपों को जोड़ें तो यह रकम करीब ₹8 करोड़ प्रति माह बैठती है। सिंह का कहना है कि एक पंप का औसत मासिक मुनाफा ही करीब ₹1 लाख है, ऐसे में यह अतिरिक्त खर्च मुनाफे का करीब 18% खा जाएगा। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि क्रेडिट-डेबिट कार्ड की तरह पेट्रोल पंपों को भी MDR से छूट दी जाए।
दूसरा पक्ष क्या कहता है
हर कोई MDR को बोझ नहीं मान रहा। एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी का कहना है कि इसे टैक्स समझना ठीक नहीं यूपीआई के बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और धोखाधड़ी-रोकथाम पर हर साल सरकार को करीब ₹20,000 करोड़ खर्च करने पड़ते हैं, और लंबे समय तक यह पूरा सिस्टम सिर्फ सब्सिडी पर नहीं चल सकता।
आंकड़ों में मध्य प्रदेश का यूपीआई कारोबार
NPCI के आंकड़े बताते हैं कि इस साल अगस्त में अकेले मध्य प्रदेश में करीब ₹63,628 करोड़ का यूपीआई लेन-देन हुआ, जिसमें भोपाल और इंदौर की हिस्सेदारी लगभग 28% यानी ₹17,963 करोड़ रही औसतन हर घंटे करीब ₹24 करोड़ का कारोबार।
