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MP Transfer Policy 2026 : मध्य प्रदेश में तबादलों पर बड़ा फैसला आज, कर्मचारियों को मिल सकती है राहत,तबादला नीति में ये बड़े बदलाव


  • नई तबादला नीति के ड्राफ्ट को मुख्यमंत्री सचिवालय की मंजूरी मिल चुकी है।
  • प्रशासनिक और स्वैच्छिक तबादलों के लिए अब अलग-अलग नियम लागू होंगे।
  • जिले स्तर पर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के तबादले प्रभारी मंत्री करेंगे।
  • सभी विभागों में अब पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे।
MP Transfer Policy 2026 : मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित तबादला नीति का इंतजार अब खत्म होने को है। बुधवार सुबह 11 बजे मंत्रालय में आयोजित होने वाली कैबिनेट बैठक में इस नई नीति पर मुहर लग सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में विस्तृत ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिव ने इस प्रस्ताव के प्रमुख बिंदुओं पर विचार-विमर्श कर लिया है। यदि कैबिनेट से इसे हरी झंडी मिलती है, तो विभाग जल्द ही इसके कार्यान्वयन के लिए आधिकारिक आदेश जारी कर देगा।

प्रशासनिक और स्वैच्छिक तबादलों में होगा बड़ा बदलाव

मौजूदा व्यवस्था में प्रशासनिक और स्वैच्छिक दोनों प्रकार के तबादलों को एक ही कुल प्रतिशत की सीमा में रखा जाता था, जिसके कारण कई बार आवश्यकता होने पर भी तबादले नहीं हो पाते थे। नई नीति में सरकार इस सीमा को लचीला बनाने पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासनिक आधार पर तबादलों की संख्या बढ़ाने पर सहमति बनी है, जबकि स्वैच्छिक तबादलों के लिए अलग और स्पष्ट नियम तय किए जाएंगे। कैबिनेट मंत्री विजय शाह द्वारा स्वैच्छिक तबादलों की लिमिट खत्म करने के सुझाव के बाद सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।

ऑनलाइन आवेदन और अधिकारियों का दायरा

नई नीति की एक मुख्य विशेषता पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। इसके तहत सभी विभागों से ऑनलाइन आवेदन लेने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हालांकि, स्कूल शिक्षा, जनजातीय कार्य, ऊर्जा और राजस्व जैसे विभाग अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार अलग गाइडलाइन जारी कर सकेंगे, लेकिन ये सभी सामान्य प्रशासन विभाग के मूल नियमों के दायरे में ही होंगे। तबादलों के अधिकारों को लेकर भी स्पष्टता रखी गई है। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले अब संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री और कलेक्टर की मंजूरी से हो सकेंगे। वहीं, प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के तबादले मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद ही प्रभावी होंगे। साथ ही, पिछले एक वर्ष के भीतर स्थानांतरित हुए कर्मचारियों को सामान्य स्थितियों में दोबारा ट्रांसफर नहीं किया जाएगा, जिससे कार्यप्रणाली में स्थिरता बनी रहे।

मंत्रियों के स्वेच्छानुदान की सीमा में भी हुई वृद्धि

तबादला नीति के साथ-साथ सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में अन्य महत्वपूर्ण बदलाव भी किए हैं। हाल ही में राज्यमंत्रियों के स्वेच्छानुदान की राशि को 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। कैबिनेट मंत्रियों के लिए यह सीमा पहले ही 40 हजार रुपये की जा चुकी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं, जिसे प्रशासनिक फेरबदल की तैयारियों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। बुधवार की कैबिनेट बैठक में इन निर्णयों के साथ अन्य कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रस्तावों पर भी मुहर लगने की पूरी उम्मीद है।