MP में लॉरेंस बिश्नोई गैंग की एंट्री? कारोबारियों से मांगी 15 करोड़ की रंगदारी, फायरिंग से मचा हड़कंप
MP में लॉरेंस बिश्नोई गैंग की एंट्री? कारोबारियों से मांगी 15 करोड़ की रंगदारी, फायरिंग से मचा हड़कंप
Madhya Pradesh News today : मध्य प्रदेश, जिसे लंबे समय से ‘शांति का टापू’ कहा जाता रहा है, अब संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराधी गिरोहों के निशाने पर है। पिछले एक महीने के भीतर राज्य के विभिन्न हिस्सों में आधा दर्जन से अधिक ऐसी वारदातें हुई हैं, जहां व्यापारियों और रसूखदारों को कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर जान से मारने की धमकी दी गई है।
भोपाल, इंदौर, अशोकनगर और खरगोन जैसे शहरों में अपराधियों ने न केवल फोन पर करोड़ों रुपये की मांग की है, बल्कि दहशत फैलाने के लिए फायरिंग और पेट्रोल बम फेंकने जैसी घटनाओं को भी अंजाम दिया है। इस उभरते खतरे ने मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इन सभी वारदातों में एक समानता देखी गई है। धमकी देने वाला व्यक्ति खुद को बिश्नोई गैंग का सक्रिय सदस्य ‘हैरी बॉक्सर’ बताता है। रंगदारी की रकम छोटी-मोटी नहीं, बल्कि 10 से 15 करोड़ रुपये के बीच मांगी जा रही है। अपराधी इस राशि को ‘सिक्योरिटी मनी’ का नाम देते हैं और भुगतान न करने पर पूरे परिवार को खत्म करने की सीधी चेतावनी देते हैं।
इस संगठित अपराध के पीछे तकनीकी रूप से सक्षम अपराधी बैठे हैं जो अपनी पहचान छुपाने के लिए अमेरिकी वीपीएन नंबरों और व्हाट्सएप इंटरनेट कॉलिंग का सहारा ले रहे हैं। यही कारण है कि पुलिस के साइबर सेल के लिए इन कॉल्स की सटीक लोकेशन का पता लगाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
अशोकनगर में हुई घटना इस गिरोह की कार्यप्रणाली का एक बड़ा उदाहरण है। वहां के अनाज कारोबारी अंकित अग्रवाल को वॉयस नोट के जरिए 10 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। जब व्यापारी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया, तो गिरोह ने दहशत फैलाने के लिए जयपुर से एक गुर्गे को भेजा।
पुलिस ने 19 वर्षीय कैलाश जांगिड़ को छह पेट्रोल बमों के साथ गिरफ्तार किया, जिसे कारोबारी के घर पर हमला करने का काम सौंपा गया था। पूछताछ में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी कभी लॉरेंस या हैरी बॉक्सर से मिला ही नहीं था। वह केवल सोशल मीडिया पर उनकी रील्स देखकर उनका प्रशंसक बन गया था और चैटिंग के माध्यम से गिरोह के संपर्क में आया था।
इंदौर और खरगोन में भी स्थिति वैसी ही बनी हुई है। इंदौर के रियल एस्टेट कारोबारी संजय जैन से 15 करोड़ रुपये की मांग की गई है, जिसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वहीं, खरगोन के भीलगांव में कपास व्यापारी दिलीप राठौर के घर के बाहर अपराधियों ने खुलेआम गोलियां चलाईं।
फायरिंग का वीडियो बनाकर कारोबारी को भेजा गया ताकि उसे यकीन हो जाए कि धमकी देने वाले अपनी बात पर टिके हैं। इन घटनाओं से साफ है कि गिरोह अब केवल फोन पर धमकी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जमीन पर भी हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।
पुलिस जांच में एक और महत्वपूर्ण कड़ी सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली भर्ती है। यह गिरोह उन युवाओं को निशाना बना रहा है जो सोशल मीडिया पर ‘गैंगस्टर कल्चर’ से प्रभावित हैं। इन युवाओं को पैसे और रसूख का लालच देकर छोटे-छोटे टास्क दिए जाते हैं, जैसे रेकी करना या डराने के लिए फायरिंग करना।
अशोकनगर मामले में पकड़े गए युवक के बैंक खाते में बीकानेर और गोवा जैसे शहरों से पैसे ट्रांसफर किए गए थे। इससे यह संकेत मिलता है कि गिरोह का नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ है और वे स्थानीय लड़कों का इस्तेमाल कर पुलिस की नजरों से बचने की कोशिश करते हैं।
व्यापारिक संगठनों ने इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। व्यापारियों का कहना है कि अगर प्रदेश के प्रमुख शहरों में इस तरह की रंगदारी की घटनाएं बढ़ेंगी, तो इससे न केवल व्यापार प्रभावित होगा बल्कि प्रदेश की छवि पर भी बुरा असर पड़ेगा। भोपाल में भी एक कारोबारी को धमकी मिलने की खबर है,
हालांकि पुलिस सुरक्षा के दावों के बीच अब तक किसी बड़ी गिरफ्तारी में सफल नहीं हो पाई है। कुछ मामलों में पुलिस ने संदिग्धों के बैंक खातों और कॉल डिटेल्स के जरिए उन तक पहुंचने की कोशिश की है, लेकिन इंटरनेट कॉलिंग के तकनीकी पेंच इसमें बाधा बन रहे हैं।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए राज्य पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। पुलिस अब उन अपराधियों की सूची तैयार कर रही है जो पहले बिश्नोई गैंग या उसके सहयोगियों के संपर्क में रहे हैं। साइबर सेल को विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय कॉल गेटवे को ट्रैक करने के लिए कहा गया है।
हालांकि, पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती उस ‘डिजिटल रिक्रूटमेंट’ को रोकना है जिसके जरिए अपराधी बैठे-बैठे मध्य प्रदेश के युवाओं को अपराध की दुनिया में धकेल रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि प्रशासन इन अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है।













