“शेमिंग टैक्टिक रणनीति” माफिया की ‘इज्जत’ मिट्टी में,लाखों नहीं, महज 1 रुपये में बिकेगी माफिया की इज्जत
नरसिंहपुर एसपी ने फरार शराब माफिया धनराज लोधी पर 1 रुपये का इनाम घोषित कर अपराधियों के अहंकार पर प्रहार किया है, जिसका उद्देश्य माफिया को समाज में अपमानित कर गिरफ्तार करना है।
MP Narsinghpur Police News : नरसिंहपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों और आम जनता के बीच हलचल मचा दी है। आमतौर पर जब भी किसी बड़े अपराधी या फरार आरोपी की तलाश होती है, तो पुलिस विभाग उसकी जानकारी देने वाले के लिए हजारों या लाखों रुपये के इनाम की घोषणा करता है।
लेकिन नरसिंहपुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने इस बार कुछ ऐसा किया है जो न केवल अनोखा है, बल्कि अपराधियों के लिए एक बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक संदेश भी है। उन्होंने इलाके के कुख्यात शराब माफिया धनराज लोधी पर महज एक रुपये के इनाम की घोषणा की है। यह खबर सोशल मीडिया से लेकर चाय की दुकानों तक चर्चा का विषय बन गई है कि आखिर एक पुलिस कप्तान ने इतना मामूली इनाम क्यों रखा।
पुलिस की नजर में अपराधी की हैसियत
जब किसी अपराधी पर एक रुपये का इनाम रखा जाता है, तो इसके पीछे पुलिस की एक सोची-समझी रणनीति होती है। नरसिंहपुर पुलिस के इस कदम का सीधा मतलब यह है कि कानून की नजर में ऐसे अपराधियों की हैसियत अब एक कौड़ी के बराबर भी नहीं बची है। पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना के इस फैसले को शराब माफियाओं के अहंकार पर एक गहरी चोट माना जा रहा है।
धनराज लोधी, जो काफी समय से पुलिस की पकड़ से दूर चल रहा है, उसके लिए यह इनाम राशि किसी बड़े आर्थिक नुकसान से कहीं ज्यादा उसके सामाजिक सम्मान और रसूख पर प्रहार है। पुलिस यह साफ कर देना चाहती है कि शराब तस्करी जैसे काले कारोबार से पैसा कमाने वालों का समाज में कोई वजूद नहीं है।
अक्सर देखा गया है कि अपराधी बड़े इनामों को अपनी शान समझते हैं। वे इसे अपनी ‘पहुंच’ और ‘खौफ’ का पैमाना मानते हैं कि सरकार को उन्हें पकड़ने के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। लेकिन जब यही इनाम घटाकर एक रुपया कर दिया जाता है, तो अपराधी का वह झूठा स्वाभिमान मिट्टी में मिल जाता है।
नरसिंहपुर पुलिस का यह मनोवैज्ञानिक युद्ध अपराधियों को यह अहसास कराने के लिए है कि वे व्यवस्था के सामने कितने तुच्छ हैं। पुलिस का मानना है कि ऐसे अपराधियों को समाज में अपमानित करना उन्हें पकड़ने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो सकता है।
कौन है शराब माफिया धनराज लोधी
धनराज लोधी नरसिंहपुर जिले और आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब के कारोबार का एक बड़ा नाम बनकर उभरा था। लंबे समय से वह पुलिस के साथ लुका-छिपी का खेल खेल रहा है। उसके खिलाफ अवैध शराब की तस्करी और आबकारी अधिनियम के तहत कई गंभीर मामले दर्ज हैं।
पुलिस की कई टीमों ने उसे दबोचने के लिए जाल बिछाया, लेकिन वह हर बार बच निकलने में कामयाब रहा। उसकी इसी फरारी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद पुलिस अधीक्षक ने यह कड़ा और अनोखा रुख अपनाने का फैसला किया।

शराब माफियाओं का नेटवर्क आमतौर पर बहुत गहरा होता है। ये लोग ग्रामीण इलाकों में अपना दबदबा बनाकर रखते हैं और स्थानीय लोगों के बीच अपनी एक खास छवि गढ़ने की कोशिश करते हैं। धनराज लोधी भी इसी तरह के रसूख का इस्तेमाल कर अब तक बचता रहा है।
लेकिन अब पुलिस ने उसकी इसी छवि को ध्वस्त करने के लिए ‘एक रुपये के इनाम’ वाला कार्ड खेला है। इस कदम से पुलिस न केवल उस तक पहुंचना चाहती है, बल्कि उसके मददगारों को भी यह संदेश देना चाहती है कि वे एक ऐसे व्यक्ति का साथ दे रहे हैं जिसकी कानूनी कीमत महज एक रुपया है।
मनोवैज्ञानिक दबाव की रणनीति
अपराध विज्ञान में इसे ‘शेमिंग टैक्टिक’ यानी शर्मिंदा करने की रणनीति कहा जाता है। डॉ. ऋषिकेश मीना, जो स्वयं एक अनुभवी पुलिस अधिकारी हैं, जानते हैं कि माफिया किस्म के लोग पैसे से ज्यादा अपनी ‘इज्जत’ या ‘भौकाल’ की चिंता करते हैं। जब पुलिस रिकॉर्ड में किसी का नाम एक रुपये के इनामी के तौर पर दर्ज होता है, तो वह अपराधी जगत में मजाक का पात्र बन जाता है। पुलिस का यह दांव धनराज लोधी को इतना असहज कर सकता है कि वह दबाव में आकर कोई गलती करे या खुद ही आत्मसमर्पण कर दे।
नरसिंहपुर जिले में अवैध शराब का कारोबार एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची शराब और बाहरी राज्यों से आने वाली शराब की तस्करी ने सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाया है। पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में चल रहा यह अभियान केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की सफाई की एक कोशिश है।













