रिश्वत लेते पकड़े गए 3 इंजीनियरों की छुट्टी, सरकार ने थमाया सस्पेंशन ऑर्डर,बिल के बदले मांगे थे लाखों
- लोकायुक्त ने 21 अप्रैल को इंदौर PWD ऑफिस में बड़ी ट्रैप कार्रवाई की थी।
- ठेकेदार राजपाल सिंह से बिल पास करने के बदले 3.5 लाख रुपये मांगे गए थे।
- एक्जीक्यूटिव इंजीनियर जयदेव गौतम और SDO टी.के. जैन रंगे हाथों गिरफ्तार हुए।
- मैथवाड़ा फोरलेन के काम का भुगतान अटकाने के लिए रिश्वत का दबाव बनाया गया था।
- लोक निर्माण विभाग ने तीनों आरोपित अधिकारियों को अब नौकरी से निलंबित कर दिया है।
Corruption in MP : मध्यप्रदेश के इंदौर में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने अपने तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह सख्त कदम तब उठाया गया, जब 21 अप्रैल को लोकायुक्त की टीम ने इन्हें एक ठेकेदार से 3 लाख 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोचा था। अपनी मेहनत के बिल पास कराने के नाम पर कमीशन मांगना इन अधिकारियों को अब बहुत भारी पड़ गया है।
कैसे शुरू हुआ भ्रष्टाचार का यह खेल?
पूरा मामला धार के रहने वाले एक सरकारी ठेकेदार राजपाल सिंह पंवार से जुड़ा है। उनकी फर्म ‘पटेल इंटरप्राइजेस’ ने साल 2023 में मैथवाड़ा फोरलेन बनाने का टेंडर लिया था। राजपाल सिंह ने लगभग 4.51 करोड़ रुपये की लागत से इस सड़क का निर्माण कार्य पूरी ईमानदारी से समय पर पूरा किया।
जब काम खत्म हो गया, तो नियम के मुताबिक उन्हें अपना आखिरी भुगतान (फाइनल बिल) मिलना था। लेकिन इंदौर PWD कार्यालय में बैठे अधिकारियों की नीयत कुछ और ही थी। बिल पास करने की फाइल आगे बढ़ाने के बदले उनसे लाखों रुपये की मांग की गई।
लोकायुक्त का जाल और अधिकारियों की गिरफ्तारी
जब भ्रष्टाचार की मांग हद से बढ़ गई, तो राजपाल सिंह ने हार मानने के बजाय इंदौर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत कर दी। लोकायुक्त पुलिस ने पहले इस शिकायत की गहराई से जांच की और जब मामला सही पाया गया, तो जाल बिछाया गया। 21 अप्रैल को जैसे ही रिश्वत की रकम का लेन-देन शुरू हुआ, लोकायुक्त की टीम ने धावा बोल दिया।
इस कार्रवाई में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर जयदेव गौतम को 1 लाख 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। वहीं, एसडीओ (SDO) टी.के. जैन को ऑफिस कैंपस के पोर्च के पास से 1 लाख रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया गया।
तीसरे आरोपी सब-इंजीनियर अंशु दुबे ने भी रिश्वत की मांग की थी, लेकिन उस वक्त रकम कम होने की वजह से उसने पैसे नहीं पकड़े थे। हालांकि, साक्ष्यों और मिलीभगत के आधार पर लोकायुक्त ने कुल 2 लाख 50 हजार रुपये जब्त किए और तीनों को आरोपी बनाया।
विभाग ने लिया कड़ा एक्शन
लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद लोक निर्माण विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया है। विभाग ने भ्रष्टाचार के आरोपी तीनों इंजीनियरों जयदेव गौतम, टी.के. जैन और अंशु दुबे को निलंबित (Suspend) कर दिया है। सरकार के इस फैसले से विभाग के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच एक साफ संदेश गया है कि भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



ठेकेदार राजपाल सिंह की हिम्मत और लोकायुक्त की मुस्तैदी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर नागरिक जागरूक हों, तो सिस्टम की गंदगी को साफ किया जा सकता है। फिलहाल, इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच और कानूनी कार्यवाही जारी है।













