Seoni Hawala Case News : सुप्रीम कोर्ट से निलंबित SDOP पूजा पांडे को राहत, 3 साल की बेटी बनी जमानत का बड़ा आधार
सात महीने से जेल में बंद महिला अधिकारी को मानवीय आधार पर मिली जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने कहा,यह फैसला केस के गुण-दोष पर नहीं
Seoni Hawala Case News : मध्य प्रदेश के बहुचर्चित सिवनी हवाला कांड में निलंबित SDOP पूजा पांडे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। करीब सात महीने से जेल में बंद पूजा पांडे को अदालत ने मानवीय आधार पर जमानत दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह राहत मामले के मेरिट पर नहीं, बल्कि इसलिए दी जा रही है क्योंकि उनकी तीन साल की बेटी भी उनके साथ जेल में रह रही थी। मामला अक्टूबर 2025 में सामने आया था, जब सिवनी जिले में कथित हवाला रकम की बरामदगी और पुलिस कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था।
क्या है सिवनी हवाला कांड?
सिवनी हवाला कांड ने पिछले कुछ महीनों में मध्य प्रदेश पुलिस व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए। मामला 8 और 9 अक्टूबर 2025 की दरम्यानी रात का है। सिवनी जिले के लखनवाड़ा थाना क्षेत्र स्थित सीलादेही फोरलेन बायपास पर पुलिस टीम वाहन चेकिंग कर रही थी। इस कार्रवाई का नेतृत्व तत्कालीन SDOP पूजा पांडे कर रही थीं।
पुलिस ने कटनी से जालना जा रही एक संदिग्ध कार को रोका। तलाशी के दौरान वाहन से करीब 2.96 करोड़ रुपये नकद मिलने का दावा किया गया। शुरुआती जांच में इसे हवाला नेटवर्क से जुड़ा मामला माना गया। लेकिन अगले ही दिन घटनाक्रम ने बड़ा मोड़ ले लिया।
कारोबारी के आरोपों से खुला मामला
कार में मौजूद व्यापारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस टीम ने उन्हें डराया-धमकाया और रातभर थाने में रोके रखा। आरोप यह भी लगा कि पूरी राशि की आधिकारिक जब्ती नहीं दिखाई गई।
शिकायत के मुताबिक, पुलिस रिकॉर्ड में केवल 1.45 करोड़ रुपये की जब्ती दर्ज की गई, जबकि बाकी रकम कथित तौर पर गायब कर दी गई। इसी आरोप के बाद मामला सीधे वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य सरकार तक पहुंचा।
सूत्रों के अनुसार, जब कारोबारी अगले दिन पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा, तब पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता देखते हुए तत्कालीन डीजीपी ने पूजा पांडे को निलंबित कर दिया। उनके साथ कई अन्य पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई हुई।
सरकारी आवास से नकदी बरामद होने का दावा
जांच एजेंसियों ने बाद में पूजा पांडे और अन्य आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की। पुलिस के अनुसार, महिला अधिकारी के सरकारी आवास और कार्यालय से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद हुई।
इसके बाद 14 अक्टूबर 2025 को पूजा पांडे समेत 11 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
हालांकि, मामले में जांच अभी जारी है और अदालत में आरोपों को अंतिम रूप से साबित किया जाना बाकी है। भारतीय न्याय व्यवस्था में आरोप साबित होने तक किसी भी आरोपी को दोषी नहीं माना जाता।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जमानत का फैसला केवल मानवीय परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। अदालत ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया कि पूजा पांडे की तीन वर्षीय बेटी लंबे समय से जेल परिसर में रह रही थी।
हाई कोर्ट से अन्य आरोपियों को पहले ही मिल चुकी थी राहत
इस मामले में कई अन्य आरोपियों को पहले ही जबलपुर हाई कोर्ट से जमानत मिल चुकी थी। वहीं, दो आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर भी निरस्त हो चुकी हैं।
इन्हीं परिस्थितियों का हवाला देते हुए पूजा पांडे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद उन्हें सशर्त जमानत देने का फैसला सुनाया।













