बरगी डैम क्रूज हादसा: कोर्ट सख्त, पर्यटकों को डूबता छोड़ भागने वाले ड्राइवर और क्रू मेंबर्स पर 2 दिन में FIR के आदेश
- जबलपुर जिला कोर्ट ने बरगी डैम क्रूज हादसे की खबरों पर स्वतः संज्ञान लिया है।
- न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस को 2 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया।
- क्रूज चालक पर पर्यटकों को डूबते छोड़ खुद जान बचाकर भाग निकलने का गंभीर आरोप है।
- ड्राइवर के खिलाफ बीएनएस की धारा 106 और 110 के तहत मामला चलाने का निर्देश दिया गया।
- कोर्ट ने हादसे के समय अपनी जान पर खेलकर दर्जनों लोगों को बचाने वाले मजदूरों की तारीफ की।
Bargi dam accident news : जबलपुर के प्रसिद्ध बरगी डैम में पिछले गुरुवार (30 अप्रैल) को हुए दर्दनाक क्रूज हादसे पर अब न्याय तंत्र ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला न्यायालय के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार की अदालत ने समाचार पत्रों और सोशल मीडिया पर आई खबरों का स्वतः संज्ञान लेते हुए बड़ा कदम उठाया है।
कोर्ट ने बरगी थाना प्रभारी को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे हादसे के जिम्मेदार क्रूज चालक और चालक दल (क्रू) के अन्य सदस्यों के खिलाफ दो दिन के भीतर एफआईआर (FIR) दर्ज करें। कोर्ट ने साफ कहा कि पर्यटकों को संकट में छोड़कर खुद सुरक्षित भाग निकलना एक गंभीर अपराध है, जिस पर तुरंत कानूनी कार्रवाई होनी जरूरी है। इस भीषण हादसे में 13 लोगों की डूबने से मौत हो गई थी, जबकि वहां मौजूद कुछ स्थानीय मजदूरों की मुस्तैदी से कई लोगों की जान बचाई जा सकी।
कोर्ट की नाराजगी और पुलिस को दो दिन की मोहलत
न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए निर्देश दिया कि बरगी थाना प्रभारी पूरे घटनाक्रम और स्थितियों को समझकर दो दिन के भीतर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज करें। इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है कि एफआईआर दर्ज करने के बाद दो दिन के भीतर अदालत को इसकी लिखित सूचना दी जाए और मामले की जांच तेज की जाए।
‘कार्रवाई नहीं हुई तो गलत मिसाल बनेगी’
अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि अगर ऐसे मामलों में तुरंत और सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज में एक बेहद गलत संदेश जाएगा। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि आज इस लापरवाही को बिना जांच के छोड़ दिया गया, तो भविष्य में क्रूज या नाव संचालित करने वाला कोई भी व्यक्ति किसी अनहोनी के समय यात्रियों की मदद करने के बजाय उन्हें मरता हुआ छोड़कर भाग जाएगा। ऐसी प्रवृत्तियों को रोकने के लिए कानून का सख्त होना जरूरी है।
ड्राइवर और क्रू मेंबर्स पर लगे गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि क्रूज का चालक पानी की गहराई, वहां के रास्तों और क्रूज की गतिविधियों से अच्छी तरह वाकिफ था। संकट के समय पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी पहली जिम्मेदारी थी। इसके बावजूद, उसने अंदर बैठे पर्यटकों को डूबते हुए छोड़ दिया और खुद सुरक्षित बाहर निकल आया।
अदालत के अनुसार, ड्राइवर का यह व्यवहार भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 106 (लापरवाही से मौत) और धारा 110 (आपराधिक मानव वध करने का प्रयास) के तहत आता है। इसके साथ ही क्रूज के अन्य सदस्यों पर भी आरोप हैं कि वे आपातकालीन स्थिति में यात्रियों को लाइफ जैकेट उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम रहे, जिससे मौतों का आंकड़ा बढ़ गया।
क्या था पूरा बरगी डैम हादसा?
यह दुखद घटना 30 अप्रैल को जबलपुर जिले से गुजरने वाली नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम के बैकवाटर में हुई थी। हर दिन की तरह उस दिन भी पर्यटक क्रूज पर सवार होकर सैर का आनंद ले रहे थे, तभी अचानक क्रूज असंतुलित होकर पानी में पलट गया। इस हादसे में 13 पर्यटकों की असमय मौत हो गई। घटना के बाद से ही क्रूज प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।
जान बचाने वाले जांबाज हीरोज की कोर्ट ने की तारीफ
जहां एक तरफ अदालत ने क्रूज स्टाफ की संवेदनहीनता पर कड़ा गुस्सा जाहिर किया, वहीं दूसरी तरफ हादसे के वक्त देवदूत बनकर आए स्थानीय मजदूरों की जमकर सराहना की। क्रूज पलटते ही पास में काम कर रहे कुछ मजदूरों ने अपनी जान की बाजी लगाकर पानी में छलांग लगा दी थी।
इन जांबाज हीरोज की सजगता और त्वरित सूझबूझ के कारण करीब एक दर्जन लोगों को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल लिया गया। अदालत ने इन मजदूरों की बहादुरी को पूरे देश के लिए प्रेरणादायक बताया है।












