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अब आपका फोन बताएगा शराब की सही कीमत, मध्य प्रदेश में अवैध वसूली रोकने के लिए सरकार ने लागू किया नया तरीका

  • मध्य प्रदेश की हर शराब दुकान पर अब 5 क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • ग्राहक स्कैन करके सीधे जिले की आधिकारिक रेट लिस्ट अपने मोबाइल पर देख सकेंगे।
  • तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूलने पर दुकान का लाइसेंस तुरंत रद्द करने का प्रावधान है।

MP Liquor Shop New Rule : मध्य प्रदेश के किसी भी शहर में शराब की दुकान पर जाते समय अक्सर ग्राहकों के मन में एक डर होता है कि कहीं सेल्समैन बोतल पर लिखे दाम से 20 या 50 रुपये ज्यादा न मांग ले। यह समस्या प्रदेश में लंबे समय से एक सिरदर्द बनी हुई थी, जिसे आम बोलचाल में ‘ओवररेटिंग’ कहा जाता है।

लेकिन अब राज्य सरकार और आबकारी विभाग ने इस लूट को पूरी तरह खत्म करने के लिए तकनीक का सहारा लिया है। अब आपको दुकानदार से बहस करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि आपकी जेब पर डाका डालने वालों का इलाज आपके अपने मोबाइल फोन में छिपा है।

मध्य प्रदेश आबकारी विभाग ने एक क्रांतिकारी फैसला लेते हुए प्रदेश की सभी शराब दुकानों पर क्यूआर कोड (QR Code) लगाना अनिवार्य कर दिया है। यह कदम न केवल पारदर्शिता लाएगा बल्कि उन दुकानदारों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है जो ग्राहकों की मजबूरी का फायदा उठाते थे।

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आखिर क्यों पड़ी इस नई व्यवस्था की जरूरत?

मध्य प्रदेश में शराब के व्यापार को लेकर विभाग के पास शिकायतों का अंबार लगा रहता था। अधिकतर शिकायतें इस बात को लेकर होती थीं कि शराब की दुकानों पर कोई आधिकारिक रेट लिस्ट नहीं होती और सेल्समैन ग्राहकों से मनमानी कीमतें वसूलते हैं। कई बार प्रिंट रेट यानी एमआरपी (MRP) से कहीं ज्यादा पैसे मांगे जाते थे और विरोध करने पर ग्राहकों के साथ बदसलूकी की खबरें भी आम थीं।

विभाग ने महसूस किया कि केवल जुर्माना लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जहाँ ग्राहक खुद सशक्त महसूस करे। इसी सोच के साथ ई-आबकारी पोर्टल के जरिए डिजिटल समाधान निकाला गया है। अब राज्य की हर छोटी-बड़ी शराब दुकान पर क्यूआर कोड चस्पा करना अनिवार्य है ताकि हर लेनदेन में पारदर्शिता बनी रहे और ग्राहकों को सही कीमत का पता चल सके।

स्कैन करते ही सामने आएगा कीमतों का पूरा सच

इस नई डिजिटल व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी इसकी सादगी और पहुंच है। आबकारी विभाग के निर्देशानुसार, अब हर शराब दुकान पर ई-आबकारी पोर्टल से जनरेट किया गया एक विशेष क्यूआर कोड लगा होगा। ग्राहक जैसे ही अपने स्मार्टफोन से इस कोड को स्कैन करेगा, उसके मोबाइल स्क्रीन पर एक आधिकारिक वेब पेज खुल जाएगा। इस पेज पर उस संबंधित जिले की पूरी और अपडेटेड रेट लिस्ट उपलब्ध होगी।

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इसमें हर ब्रांड की शराब और बीयर की अधिकृत कीमतें लिखी होंगी। इससे फायदा यह होगा कि ग्राहक को किसी से पूछने या रेट लिस्ट ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यदि दुकानदार आपसे 500 रुपये मांग रहा है और स्कैन करने पर कीमत 450 रुपये दिख रही है, तो आपके पास दुकानदार की मनमानी को चुनौती देने का ठोस आधार होगा।

आबकारी आयुक्त की सख्त चेतावनी: लाइसेंस पर गिरेगी गाज

इस आदेश को महज एक औपचारिकता न समझा जाए, इसके लिए आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने बेहद कड़े तेवर अपनाए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में इस नई व्यवस्था का पालन हर हाल में होना चाहिए। उन्होंने शराब दुकान मालिकों को चेतावनी दी है कि अगर किसी भी दुकान पर तय दर से एक रुपया भी ज्यादा वसूला गया, तो विभाग केवल जुर्माना लगाकर चुप नहीं बैठेगा।

ऐसी स्थिति में संबंधित दुकान का लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। यह एक ऐसा फैसला है जिसने दुकान मालिकों के बीच हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि लाइसेंस रद्द होने का मतलब है करोड़ों रुपये का नुकसान। विभाग का लक्ष्य साफ है कि जनता के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

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एक या दो नहीं, हर दुकान पर लगेंगे पांच क्यूआर कोड

अक्सर देखा गया है कि नियमों से बचने के लिए दुकानदार रेट लिस्ट या जरूरी सूचनाओं को किसी कोने में छिपा देते हैं जहाँ ग्राहक की नजर न पड़े। इस चालाकी को रोकने के लिए विभाग ने एक नया नियम बनाया है। अब हर शराब दुकान पर अनिवार्य रूप से कम से कम पांच क्यूआर कोड लगाने होंगे।

ये कोड दुकान के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी जगहों पर लगाए जाएंगे जहाँ ग्राहक खड़े होते हैं या जहाँ से वे सामान लेते हैं। विभाग ने निर्देश दिया है कि ये कोड ऐसी ऊंचाई पर और ऐसी जगह होने चाहिए जहाँ से कोई भी व्यक्ति आसानी से उन्हें स्कैन कर सके। यदि कोई कोड खराब होता है या फट जाता है, तो दुकानदार की यह जिम्मेदारी होगी कि वह बिना किसी देरी के उसे बदले।

10 दिनों का महाअभियान और सघन निगरानी

सिर्फ नियम बनाना काफी नहीं होता, उसे जमीन पर उतारना सबसे बड़ी चुनौती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश आबकारी विभाग ने 28 अप्रैल 2026 से एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान 7 मई 2026 तक यानी पूरे 10 दिनों तक चलेगा। इस दौरान विभाग की टीमें प्रदेश के हर कोने में जाकर शराब दुकानों का औचक निरीक्षण कर रही हैं।

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इन टीमों का काम यह देखना है कि क्या दुकानों पर पांचों क्यूआर कोड लगे हैं? क्या वे कोड काम कर रहे हैं? और क्या दुकानदार ग्राहकों से वही कीमत ले रहे हैं जो कोड स्कैन करने पर दिखाई दे रही है? इस अभियान की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 11 मई तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपें।

Alok Singh

मेरा नाम आलोक सिंह है मैं भगवान नरसिंह की नगरी नरसिंहपुर से हूं ।और पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में आया था ।मुझे पत्रकारिता मैं इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का 20 वर्ष का अनुभव है खबरों को प्रमाणिकता के साथ लिखने के हुनर में माहिर हूं।

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