गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइन: 2011 बैच के बाद के IPS अफसरों के लिए बदल गए नियम
गृह मंत्रालय ने IPS प्रमोशन नियमों में बदलाव कर 2011 बैच के बाद के अफसरों के लिए 2 साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अनिवार्य की है, ताकि केंद्र में खाली पदों को भरा जा सके।
- 2011 बैच और उसके बाद के IPS अफसरों के लिए केंद्र में 2 साल का अनुभव अनिवार्य हुआ।
- केंद्र में खाली पड़े 200 से ज्यादा पदों को भरने के लिए गृह मंत्रालय ने लिया सख्त फैसला।
- अब बिना केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के आईजी (IG) रैंक पर नहीं हो सकेगी नियुक्ति।
IPS Promotion Rules 2026 : भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS के अधिकारियों के लिए अब करियर की सीढ़ी चढ़ना पहले जैसा नहीं रहेगा। अगर कोई अधिकारी केंद्र सरकार में ऊंचे पदों पर बैठने का सपना देख रहा है, तो उसे अपनी फील्ड ड्यूटी के साथ-साथ दिल्ली के प्रशासनिक गलियारों का अनुभव भी लेना होगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक ऐसा फैसला लिया है जो न सिर्फ अधिकारियों के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल को भी एक नई दिशा देगा। यह बदलाव खास तौर पर उन युवा अफसरों के लिए है जो आने वाले समय में देश की सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालने वाले हैं।
प्रमोशन के लिए अब हुआ दिल्ली का अनुभव
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रमोशन के नियमों में जो बदलाव किया है, उसके तहत अब इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद तक पहुंचने का रास्ता थोड़ा बदल गया है। नए आदेश के मुताबिक, साल 2011 और उसके बाद के बैच के IPS अधिकारियों को अगर केंद्र में आईजी या उसके बराबर के पद पर तैनात होना है, तो उन्हें एक अनिवार्य शर्त पूरी करनी होगी।
यह शर्त है कम से कम दो साल तक केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति (Central Deputation) पर काम करना। यह अनुभव एसपी या डीआईजी के स्तर पर होना चाहिए। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
खाली पदों का संकट और केंद्र की चिंता
आखिर सरकार को इस तरह के सख्त नियम की जरूरत क्यों पड़ी? इसका सीधा जवाब है केंद्र में अधिकारियों की भारी कमी। वर्तमान आंकड़ों पर नजर डालें तो केंद्र सरकार के पास IPS अधिकारियों के लिए 700 से ज्यादा पद मंजूर हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से 200 से अधिक पद खाली पड़े हैं। सबसे ज्यादा कमी एसपी और डीआईजी स्तर के अधिकारियों की है।
अक्सर देखा गया है कि राज्य सरकारें अपने बेहतर अधिकारियों को केंद्र में भेजने के बजाय राज्य में ही बनाए रखना चाहती हैं। इस खींचतान की वजह से केंद्रीय सुरक्षा बलों (जैसे BSF, CRPF) और जांच एजेंसियों (जैसे CBI) में नेतृत्व का संकट पैदा हो जाता है।
राज्यों और अधिकारियों पर पड़ेगा इसका असर
इस नए नियम का व्यापक असर मध्य प्रदेश कैडर समेत देशभर के IPS अधिकारियों पर पड़ेगा। अब युवा अधिकारियों को अपने करियर की प्लानिंग नए सिरे से करनी होगी। उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि अगर वे समय पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं जाते हैं, तो भविष्य में उनके प्रमोशन की फाइल अटक सकती है।
गृह मंत्रालय का मानना है कि जब एक पुलिस अधिकारी केंद्र और राज्य दोनों के प्रशासनिक ढांचे में काम करता है, तो उसकी कार्यक्षमता और नजरिया दोनों बेहतर होते हैं। इससे केंद्र और राज्य सरकारों के बीच एक संतुलित सेवा अनुभव विकसित होगा।
फैसले का मुख्य उद्देश्य
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय स्तर पर पुलिस नेतृत्व को और अधिक सशक्त बनाना है। जब अनुभवी अधिकारी केंद्र में आएंगे, तो सशस्त्र बलों और केंद्रीय संगठनों की कार्यप्रणाली में सुधार होगा। यह नियम यह भी सुनिश्चित करता है कि जो अधिकारी भविष्य में बड़े राष्ट्रीय सुरक्षा के फैसले लेंगे, उन्हें जमीनी स्तर के साथ-साथ केंद्रीय नीतियों की भी गहरी समझ हो। लंबे समय से चल रही अधिकारियों की कमी को दूर करने के लिए गृह मंत्रालय का यह दांव पुलिसिंग के ढांचे में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।












