नरसिहपुर इतवारा बाजार शराब कांड: क्या ठेकेदार के रसूख के आगे झुक गया आबकारी विभाग?

- इतवारा बाजार के एक भवन में बिना अनुमति भारी मात्रा में शराब का भंडारण मिला।
- स्थानीय लोगों के कड़े विरोध के बाद मौके पर पहुँची आबकारी विभाग की टीम।
- अधिकारियों ने कार्रवाई के बजाय ‘लाइसेंसी माल’ बताकर ठेकेदार को बचाया।
- जनता का आरोप है कि बिना अनुमति गोदाम बनाना आबकारी नियमों का उल्लंघन है।
- रिहायशी इलाकों में शराब माफियाओं की बढ़ती दखल से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश।
Narsihpur Excise Department : नरसिहपुर के इतवारा बाजार इलाके में इन दिनों तनाव और गुस्से का माहौल है। हाल ही में यहाँ एक निजी भवन में अवैध रूप से भारी मात्रा में शराब रखी मिली, जिसने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है। यह पूरा मामला तब गरमाया जब सूचना मिलने पर आबकारी विभाग की टीम मौके पर तो पहुँची,
लेकिन कार्रवाई करने के बजाय केवल यह कहकर लौट गई कि यह शराब एक लाइसेंसी ठेकेदार की है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या लाइसेंस मिल जाने मात्र से किसी ठेकेदार को रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति शराब डंप करने की छूट मिल जाती है?
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
इतवारा बाजार के निवासियों को संदेह था कि इलाके के एक भवन में चोरी-छिपे शराब की दुकान खोलने की तैयारी चल रही है। स्थानीय लोगों ने जब इसका विरोध किया और अंदर जाकर देखा तो वहाँ पहले से ही भारी मात्रा में शराब का स्टॉक मौजूद था। तुरंत इसकी जानकारी आबकारी विभाग को दी गई।
मौके पर पहुँचे अधिकारियों ने जब्ती बनाने या जुर्माना लगाने के बजाय ठेकेदार का पक्ष लेते हुए मामले से पल्ला झाड़ लिया। विभाग के इस रवैये ने आग में घी डालने का काम किया है और अब लोग सीधे तौर पर विभाग की कार्यप्रणाली पर उंगली उठा रहे हैं।
क्या लाइसेंस का मतलब कानून से ऊपर होना है?
इतवारा बाजार के रहने वाले लोगों का तर्क बेहद सीधा और तार्किक है। उनका कहना है कि वे इस बात से इनकार नहीं कर रहे कि शराब किसी लाइसेंसी ठेकेदार की हो सकती है। लेकिन मुद्दा यह है कि शराब बेचने और उसे रखने (स्टोरेज) के लिए विभाग एक निश्चित स्थान और क्षेत्र तय करता है।
बिना विभाग की लिखित अनुमति और बिना तय दुकान के, किसी भी रैंडम बिल्डिंग में शराब का भंडारण करना आबकारी नियमों का खुला उल्लंघन है। लोगों का आरोप है कि विभाग ने कार्रवाई करने के बजाय मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की है।
आबकारी विभाग की कार्यशैली पर उठते सवाल
इस पूरी घटना ने जिले में कानून के दोहरे मापदंडों को उजागर किया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर किसी आम आदमी के घर से शराब की एक छोटी बोतल भी मिल जाए, तो विभाग तुरंत आबकारी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लेता है।
वहीं, जब एक रसूखदार ठेकेदार बिना किसी परमिशन के रिहायशी इलाके में शराब का गोदाम बना लेता है, तो उसे ‘लाइसेंसी माल’ बताकर क्लीन चिट दे दी जाती है। जनता अब विभाग से यह स्पष्टीकरण मांग रही है कि क्या कोई भी ठेकेदार अपनी मर्जी से शहर के किसी भी कोने में गोदाम बना सकता है।












