नरसिंहपुर सड़क बनने से पहले ही डकार लिए करोड़ों रुपये, कागजों पर काम पूरा और पेमेंट भी फुल,कार्यपालन यंत्री और सब-इंजीनियर की जोड़ी ने किया कमाल
PWD विभाग की बड़ी लापरवाही आई सामने; 41 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य अधूरा होने के बावजूद अधिकारियों ने कर दिया पूरा भुगतान, ग्रामीणों में भारी आक्रोश।
- नरसिंहपुर में 41 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण में करोड़ों के घोटाले का आरोप।
- धरातल पर काम अधूरा होने के बाद भी ठेकेदार को किया गया पूरा भुगतान।
- ग्रामीण क्षेत्रों में एप्रोच रोड और नालियों का निर्माण नहीं किया गया।
- कार्यपालन यंत्री और प्रभारी SDO की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखा गया।
- मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और कलेक्टर से शिकायत के बाद मामले ने पकड़ी तूल।
Madhya Pradesh News : नरसिंहपुर जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ गोटेगांव क्षेत्र में लगभग 41 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि धरातल पर सड़क का काम अभी भी अधूरा है,
लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इसे ‘पूरा’ दिखाकर पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया है। इस पूरे खेल में प्रभारी कार्यपालन यंत्री अरविंद कुमार किटहा और नरसिंहपुर अनुभाग अधिकारी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जिला कलेक्टर से शिकायत की है, जिसके बाद अब विभाग के भीतर खलबली मच गई है।
कागजों पर दौड़ रही गाड़ियां, जमीन पर गड्ढे और धूल
यह पूरा मामला नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव अनुभाग और नरसिहपुर से जुड़ा है। यहाँ की लगभग 41 किलोमीटर गोटेगांव सांकल, नरसिहपुर की सड़क के लिए शासन ने 63 करोड़ का बजट आवंटित किया था। नियम के मुताबिक, निर्माण कार्य पूरा होने और उसकी गुणवत्ता की जांच के बाद ही अंतिम भुगतान किया जाना चाहिए था।
लेकिन यहाँ नियम-कायदों को ताक पर रख दिया गया। निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है, कई हिस्सों में डामरीकरण बाकी है और फिनिशिंग का काम भी अधूरा है, फिर भी अधिकारियों ने ‘कार्य पूर्ण’ होने का प्रमाण पत्र जारी कर दिया और ठेकेदार को पूरा भुगतान कर दिया।
इस लापरवाही मे सड़क के कई हिस्सों में एप्रोच रोड का निर्माण ही नहीं किया गया है। इसका मतलब यह है कि मुख्य सड़क तो बना दी गई (वह भी आधी-अधूरी), लेकिन गांव की गलियों या खेतों से मुख्य सड़क को जोड़ने वाले रास्ते छोड़ दिए गए। इससे वाहन चालकों को सड़क पर चढ़ने और उतरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में यह स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है क्योंकि एप्रोच रोड न होने से दुर्घटनाओं का अंदेशा बढ़ जाता है।
गांवों में नाली निर्माण को भूला विभाग
सड़क निर्माण के साथ-साथ सड़क किनारे नालियों का निर्माण भी योजना का हिस्सा होता है, ताकि बारिश का पानी गांव के भीतर जमा न हो। लेकिन इस 41 किलोमीटर के प्रोजेक्ट में ठेकेदार और इंजीनियरों ने गांवों के पास नाली निर्माण की जरूरत ही नहीं समझी। ग्रामीणों का आरोप है कि नाली न होने की वजह से अब घरों का पानी सड़क पर जमा हो रहा है और आने वाले मानसून में पूरे गांव में जलभराव की स्थिति पैदा हो जाएगी।

गांव के लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार मौके पर मौजूद कर्मचारियों से इसकी शिकायत की, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। अधिकारियों का रवैया इतना उदासीन रहा कि अब ग्रामीणों को न्याय के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ रहा है। कलेक्टर नरसिंहपुर को भी इस संबंध में कई शिकायती पत्र सौंपे गए हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बिना नाली निर्माण और एप्रोच रोड के इस सड़क को ‘पूर्ण’ मानना भ्रष्टाचार का सीधा सबूत है।
प्रशासनिक मिलीभगत और नियमों की अनदेखी
इस भ्रष्टाचार मे एक बड़ी साठगांठ नजर आती है। जानकारी के अनुसार, कार्यपालन यंत्री अरविंद कुमार किटहा ने गोटेगांव के अनुभाग अधिकारी को इस कार्य की जिम्मेदारी देने के बजाय, नरसिंहपुर के अनुभाग अधिकारी के साथ मिलकर इस पूरे निर्माण कार्य को अंजाम दिया।
जानकारों का कहना है कि यह प्रशासनिक प्रक्रिया का उल्लंघन है, क्योंकि जिस क्षेत्र में काम हो रहा है, वहां के जिम्मेदार अधिकारी को नजरअंदाज करना किसी बड़ी गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
इतना ही नहीं, इस पूरे मामले में जबलपुर के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार करते हुए एक सब-इंजीनियर को ही गोटेगांव अनुभाग का प्रभारी अनुभागीय अधिकारी (SDO) बना दिया गया।
वही सब-इंजीनियर इस सड़क के निर्माण की देखरेख कर रहे थे और वही प्रभारी अधिकारी के रूप में फाइलों को पास भी कर रहे थे। एक ही व्यक्ति का जांचकर्ता और मंजूरी देने वाला अधिकारी होना इस बात की पुष्टि करता है कि भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए यह पूरी बिसात बिछाई गई थी।
जांच के घेरे में जिम्मेदार अधिकारी
नरसिंहपुर के इस सड़क घोटाले ने PWD विभाग की कार्यप्रणाली पर कालिख पोत दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक उच्च स्तरीय जांच नहीं होगी, तब तक दोषियों पर कार्रवाई होना मुश्किल है। ग्रामीणों ने मांग की है कि भुगतान की गई राशि की वसूली की जाए और अधूरे पड़े काम को तुरंत पूरा कराया जाए। साथ ही, उन अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई हो जिन्होंने अधूरा काम होने के बावजूद फाइल पर हस्ताक्षर किए।













