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MP News Today Hindi : कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाना पड़ा भारी, टीआई चौहान पर गिरी गाज, विभागीय जांच शुरू

ग्वालियर हाई कोर्ट ने आदेश की अवहेलना पर गुना कोतवाली टीआई चंद्रप्रकाश सिंह चौहान को सस्पेंड कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की।

MP News Today Hindi : मध्य प्रदेश के गुना जिले से कानून व्यवस्था और अनुशासन को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। ग्वालियर हाई कोर्ट ने न्यायपालिका के आदेशों की अनदेखी करने पर सख्त रुख अपनाते हुए एक पुलिस अधिकारी पर कड़ी गाज गिराई है। यह मामला साफ तौर पर संदेश देता है कि कानून की नजर में वर्दी की ताकत से कहीं ज्यादा बड़ा न्याय का सम्मान होता है।

गुना पुलिस महकमे में हड़कंप

ग्वालियर हाई कोर्ट ने गुना के कोतवाली थाना प्रभारी यानी टीआई चंद्रप्रकाश सिंह चौहान को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने का आदेश जारी किया है। अदालत की नाराजगी सिर्फ सस्पेंशन तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि जस्टिस ने उनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) बैठाने के भी निर्देश दिए हैं। यह आदेश उस समय आया जब कोर्ट ने पाया कि संबंधित अधिकारी ने अदालत की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया।

अदालती कार्रवाई के दौरान यह देखा गया कि पुलिस अधिकारियों द्वारा अक्सर कोर्ट के समन या आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। इस विशिष्ट मामले में भी टीआई चौहान की ओर से लापरवाही बरती गई, जिसे कोर्ट ने अनुशासनहीनता और न्याय प्रक्रिया में बाधा माना। हाई कोर्ट का यह कड़ा फैसला उन सभी लोक सेवकों के लिए एक चेतावनी की तरह है जो अदालती आदेशों को हल्के में लेने की भूल करते हैं।

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क्यों पड़ी कोर्ट की फटकार?

दरअसल, यह पूरा विवाद कोर्ट के एक आदेश की अवहेलना से जुड़ा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि जब भी हाई कोर्ट किसी मामले में पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने या किसी व्यक्ति को पेश करने का निर्देश देता है, तो उसकी समय सीमा तय होती है। टीआई चंद्रप्रकाश सिंह चौहान ने इस प्रक्रिया में देरी की या निर्देशों को नजरअंदाज किया, जिससे नाराज होकर ग्वालियर बेंच ने यह सख्त कदम उठाया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस का काम कानून को लागू करना है, न कि उसकी अवमानना करना। जब एक जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी ही निर्देशों की अनदेखी करता है, तो इससे जनता के बीच गलत संदेश जाता है। अब सस्पेंशन के बाद होने वाली विभागीय जांच में टीआई को अपनी इस लापरवाही का ठोस कारण बताना होगा। अगर जांच में दोष सिद्ध होता है, तो उनकी मुश्किल और बढ़ सकती है।

विभागीय जांच के निर्देश

विभागीय जांच एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अधिकारी के आचरण और उसकी कार्यप्रणाली की बारीकी से समीक्षा की जाती है। सस्पेंशन के दौरान अधिकारी को अपनी ड्यूटी से दूर रहना पड़ता है और इस अवधि में उसे केवल आधा वेतन या गुजारा भत्ता ही मिलता है।

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गुना के इस मामले ने जिले के अन्य थाना प्रभारियों और पुलिसकर्मियों के बीच भी सतर्कता बढ़ा दी है। प्रशासन अब इस कोशिश में जुटा है कि कोर्ट के आदेशों का पालन समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जा सके।

Alok Singh

मेरा नाम आलोक सिंह है मैं भगवान नरसिंह की नगरी नरसिंहपुर से हूं ।और पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में आया था ।मुझे पत्रकारिता मैं इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया का 20 वर्ष का अनुभव है खबरों को प्रमाणिकता के साथ लिखने के हुनर में माहिर हूं।

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