भाजपा विधायक ने रोका 80 करोड़ का ‘खेल’, बारदाना टेंडर में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा
- पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने पुराने बारदाना खरीदी के टेंडर में गड़बड़ी की शिकायत मुख्य सचिव से की थी।
- 35 रुपये के बारदाने को 54 रुपये में खरीदने की तैयारी थी, जिससे 80 करोड़ का नुकसान हो सकता था।
- विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इस मामले को लेकर सरकार की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
Madhya Pradesh News today : मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बारदानों (जूट की बोरियां) की खरीदी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने अपनी ही सरकार की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य सचिव अनुराग जैन से शिकायत की थी।
विश्नोई का आरोप था कि सरकारी स्तर पर पुराने बारदानों को बाजार भाव से काफी महंगी कीमत पर खरीदने की तैयारी चल रही थी। इस शिकायत के बाद सरकार ने आनन-फानन में पुराना टेंडर रद्द कर दिया और नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की। अब इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
अजय विश्नोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जिस पुराने बारदाने की बाजार में कीमत लगभग 35 रुपये है, उसे सरकारी टेंडर के जरिए 54 रुपये प्रति नग के हिसाब से खरीदा जा रहा था। विधायक की सक्रियता और मुख्य सचिव को दी गई जानकारी के बाद विभाग ने इस टेंडर को निरस्त कर दिया। विश्नोई का कहना है कि अगर यह टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाती, तो सरकारी खजाने को सीधे तौर पर 80 करोड़ रुपये का चूना लग सकता था। उन्होंने टेंडर निरस्त होने को जनता के पैसे की जीत बताया है।

सत्ता पक्ष के विधायक के इस पोस्ट ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विश्नोई के पोस्ट का हवाला देते हुए राज्य सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। सिंघार ने कहा कि मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो गई हैं कि अब भाजपा के अपने विधायक ही सरकार की पोल खोल रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब विधायक खुद मान रहे हैं कि 80 करोड़ की लूट होने वाली थी, तो यह स्पष्ट है कि विभाग में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

राजनीतिक गलियारों में इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि आखिर इतनी बड़ी कीमत का अंतर अधिकारियों की नजर से कैसे बच गया। अजय विश्नोई के इस कदम ने जहां एक तरफ सरकार को संभावित आर्थिक नुकसान से बचा लिया, वहीं दूसरी तरफ पारदर्शी कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
फिलहाल, शासन ने नए सिरे से टेंडर जारी कर दिए हैं, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को शांत होने देने के मूड में नहीं दिख रहा है। कांग्रेस अब इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रही है ताकि यह पता चल सके कि टेंडर की दरों में इस हेरफेर के पीछे कौन लोग शामिल थे।












