सीएम मोहन यादव की अधिकारियों को सख्त चेतावनी, मंडियों में किसानों का शोषण हुआ तो खैर नहीं
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गेहूं खरीदी को लेकर अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की और व्यवस्थाओं को सुधारने के निर्देश दिए।
- गेहूं के स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 9 मई कर दिया गया है, जिससे किसानों को अतिरिक्त समय मिलेगा।
- मंडियों में गेहूं खरीदी की क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर अब 2250 क्विंटल प्रतिदिन कर दी गई है।
- कलेक्टर्स को मंडियों में किसानों के लिए पीने का पानी, छांव और तौल कांटों के पुख्ता इंतजाम करने के आदेश दिए गए हैं।
- सीएम ने प्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने का लक्ष्य रखा है, जिससे पशुपालकों को प्रति लीटर 8-10 रुपये का अधिक लाभ मिल रहा है।
MP Wheat Procurement 2026 : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन दिनों पूरी तरह से प्रदेश के किसानों की सहूलियत को लेकर एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। शनिवार को राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला कलेक्टरों के साथ गेहूं खरीदी की व्यवस्थाओं को लेकर एक उच्च स्तरीय और महत्वपूर्ण बैठक की।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रदेश का कोई भी किसान अपनी फसल बेचते समय परेशान न हो। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि गेहूं खरीदी के दौरान किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आनी चाहिए और इसके लिए प्रशासन को पूरी तरह मुस्तैद रहना होगा।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में गेहूं की कटाई के बाद किसान मंडियों की तरफ रुख कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस दौरान न केवल पुरानी व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि कुछ बड़े बदलावों का भी एलान किया ताकि मंडियों में लगने वाली लंबी कतारों और भीड़ से बचा जा सके। डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जमीनी स्तर पर जाकर व्यवस्थाएं देखें और यह सुनिश्चित करें कि किसान को अपनी उपज का सही दाम और सम्मान दोनों मिले।
मंडियों में सुविधाओं और व्यवस्था पर सीएम की पैनी नजर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के सभी कलेक्टर्स को दो-टूक शब्दों में निर्देश दिए हैं कि उपार्जन केंद्रों यानी खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए जरूरी इंतजाम पुख्ता होने चाहिए। बढ़ती गर्मी को देखते हुए उन्होंने विशेष रूप से कहा कि मंडियों में किसानों के बैठने के लिए छायादार जगह और पीने के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान कड़कती धूप में अपनी फसल लेकर आता है, ऐसे में उसे बुनियादी सुविधाएं न मिलना प्रशासन की बड़ी लापरवाही मानी जाएगी।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने तौल कांटों की संख्या और हम्मालों (मजदूरों) की उपलब्धता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि तौल में देरी होने की वजह से किसानों को रात-रात भर मंडियों में रुकना पड़ता है। इस समस्या को खत्म करने के लिए उन्होंने हर दिन खरीदी की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि अगर प्रशासनिक अधिकारी रोजाना मॉनिटरिंग करेंगे, तो अव्यवस्था की गुंजाइश काफी कम हो जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि मंडियों में किसानों का किसी भी स्तर पर शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ी और खरीदी क्षमता में भारी इजाफा
किसानों के हित में एक और बड़ा फैसला लेते हुए राज्य सरकार ने गेहूं की स्लॉट बुकिंग की समय सीमा को बढ़ा दिया है। अब किसान 9 मई तक अपनी सुविधा के अनुसार स्लॉट बुक कर सकते हैं। पहले इसकी समय सीमा कम थी, जिससे कई किसान परेशान हो रहे थे। अब सभी किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया को आसान और सुलभ बना दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फैसले से उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जो अभी तक अपनी फसल मंडियों तक नहीं ला पाए थे।
गेहूं उपार्जन में किसानों को कोई परेशानी न हो…
आज प्रदेश में गेहूं उपार्जन की समीक्षा कर सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए छाया, शीतल जल, तौल कांटे और हम्मालों की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करें। उपार्जन की प्रतिदिन समीक्षा करें।
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प्रशासनिक स्तर पर एक और बड़ा तकनीकी और व्यावहारिक बदलाव किया गया है। उपार्जन केंद्रों की प्रतिदिन की खरीदी क्षमता को 1000 क्विंटल से बढ़ाकर अब 2250 क्विंटल कर दिया गया है। यानी अब एक दिन में केंद्र पर दो गुना से भी ज्यादा गेहूं खरीदा जा सकेगा। इससे मंडियों में अनाज का अंबार नहीं लगेगा और ट्रक व ट्रैक्टरों की आवाजाही सुचारू रूप से चलती रहेगी। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिलों में इस बढ़ी हुई क्षमता के हिसाब से तुरंत नई व्यवस्थाएं लागू करें ताकि किसानों को अपनी बारी का लंबा इंतजार न करना पड़े।
मध्य प्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने का बड़ा लक्ष्य
गेहूं खरीदी के अलावा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विजन खेती से जुड़े अन्य क्षेत्रों को भी मजबूती देना है। शुक्रवार को प्रदेश की जनता के नाम अपने संबोधन में उन्होंने मध्य प्रदेश को देश की ‘मिल्क कैपिटल’ (दूध की राजधानी) बनाने का संकल्प दोहराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल फसल उत्पादन तक ही सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पशुपालन और दूध उत्पादन को भी किसानों की आय का प्रमुख जरिया बनाना चाहती है। उन्होंने बताया कि सरकार दूध उत्पादन से लेकर इसके संकलन (कलेक्शन) तक के नेटवर्क को और अधिक मजबूत कर रही है।
इस दिशा में सरकार के प्रयासों का सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ता दिख रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की वजह से अब किसानों को दूध पर 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक का अतिरिक्त लाभ मिल रहा है। इसका मतलब है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अब खेती के साथ-साथ डेयरी सेक्टर भी एक बड़ी ताकत बनकर उभर रहा है। सरकार की योजना आने वाले समय में दूध संकलन के केंद्रों को बढ़ाने और उन्नत नस्ल के पशुओं के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की है।
किसानों के भरोसे और सम्मान की राजनीति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि उनकी सरकार का मुख्य ध्येय ‘किसान कल्याण’ है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे स्वयं मंडियों का दौरा करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी बिचौलिए या असामाजिक तत्व द्वारा किसानों का आर्थिक या मानसिक शोषण न हो। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसान अन्नदाता है और उसके पसीने की पूरी कीमत उसे समय पर मिलनी चाहिए।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गेहूं खरीदी की क्षमता बढ़ाना, स्लॉट बुकिंग की तारीख को आगे बढ़ाना और मंडियों में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना यह दर्शाता है कि प्रशासन अब प्रो-एक्टिव मोड में है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री खुद भी कई केंद्रों का औचक निरीक्षण कर सकते हैं।













