MP Wheat Procurement 2026: मध्य प्रदेश के किसानों की हुई बल्ले-बल्ले, सरकार ने गेहूं खरीदी का कोटा 22 लाख टन बढ़ाया
- केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के लिए गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर बढ़वाई सीमा।
- प्रदेश में इस साल गेहूं का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना होने के कारण लिया गया फैसला।
MP Wheat Procurement 2026 : मध्य प्रदेश में इस साल गेहूं की बंपर पैदावार ने किसानों के चेहरों पर चमक बिखेर दी है, लेकिन साथ ही एक चिंता यह भी थी कि क्या सरकार उनकी पूरी फसल खरीदेगी। इसी चिंता को दूर करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव के प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने राज्य के लिए गेहूं खरीदी का कोटा बढ़ा दिया है।
रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए पहले जो लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन तय किया गया था, उसे अब बढ़ाकर लगभग 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का आभार जताया है।
किसानों की मेहनत और सरकार का साथ
इस साल मध्य प्रदेश के खेतों में गेहूं की फसल बहुत अच्छी हुई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस बार गेहूं का उत्पादन पिछले सालों की तुलना में लगभग दोगुना रहा है। जब उत्पादन इतना ज्यादा होता है, तो किसानों को डर रहता है कि कहीं उन्हें अपनी उपज कम दाम पर खुले बाजार में न बेचनी पड़े। मुख्यमंत्री मोहन यादव इस स्थिति को बखूबी समझ रहे थे, इसलिए वे लगातार केंद्र सरकार के संपर्क में थे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री अमित शाह, खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया था। उन्होंने केंद्र को अवगत कराया कि प्रदेश का किसान इस बार रिकॉर्ड तोड़ मेहनत कर चुका है और उसे सही समर्थन मूल्य मिलना जरूरी है। केंद्र सरकार ने राज्य की इस मांग को गंभीरता से लिया और 22 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त गेहूं खरीदने की मंजूरी दे दी।
बढ़ती पैदावार और वैश्विक चुनौतियां
पिछले साल की तुलना में इस साल केंद्र ने पहले ही मध्य प्रदेश का कोटा 3 लाख मीट्रिक टन बढ़ा दिया था, लेकिन उत्पादन इतना जबरदस्त हुआ कि वह भी कम पड़ने लगा। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि इस बार स्थितियां थोड़ी चुनौतीपूर्ण थीं। एक तरफ जहां वैश्विक स्तर पर गेहूं के निर्यात को लेकर कई तरह की पाबंदियां और चुनौतियां बनी हुई हैं, वहीं दूसरी तरफ इतनी बड़ी मात्रा में फसल को सुरक्षित रखने के लिए जूट के बोरों की उपलब्धता का भी संकट खड़ा हो रहा है।
बावजूद इसके, राज्य सरकार ने ठाना है कि वह किसानों का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। खरीदी केंद्रों पर भीड़ और लॉजिस्टिक्स के दबाव को देखते हुए प्रशासन अब अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है ताकि किसानों को अपनी ट्राली लेकर हफ्तों तक इंतजार न करना पड़े।
मुख्यमंत्री ने केंद्र का जताया आभार
दिल्ली से मिली इस मंजूरी के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्र सरकार के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हमेशा किसानों के कल्याण को प्राथमिकता देती है। विशेष रूप से कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के सहयोग से यह संभव हो पाया है।
अन्नदाताओं के हित में महत्वपूर्ण निर्णय🌾
केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश में गेहूं खरीदी का कोटा 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है।
ये खबर भी पढ़ें…मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस किसान हितैषी फैसले के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का आभार व्यक्त किया है।… pic.twitter.com/JVicRrN0yU
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) April 24, 2026
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी सुनिश्चित होने से राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलेगी और किसानों की जेब में सीधा पैसा पहुंचेगा।
प्रशासनिक स्तर पर अब जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खरीदी केंद्रों पर व्यवस्थाओं को और पुख्ता करें। जूट के बोरों की कमी को दूर करने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि मानसून आने से पहले खरीदी का काम सुचारू रूप से पूरा हो सके।













