कौन है “SDM पूजा सोनी” 5 हजार मेरे, 25 ऊपर के’ जिनके रिस्वत कांड की चर्चा हो रही पूरे प्रदेश मे जानिए
Narsinghpur Hindi News latest : मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ईओडब्ल्यू की टीम ने तेंदूखेड़ा एसडीएम कार्यालय में पदस्थ स्टेनो सौरभ यादव को ₹30,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई शुक्रवार को कॉलोनाइजर संजय राय की शिकायत पर की गई, जो अपनी प्रस्तावित कॉलोनी के नक्शे की निरीक्षण रिपोर्ट के लिए दफ्तर के चक्कर काट रहे थे।
हाल ही में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 249वीं रैंक हासिल कर आईएएस (IAS) बनने की तैयारी कर रहीं एसडीएम पूजा सोनी के दफ्तर में हुई इस कार्रवाई ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में कथित तौर पर ऊपरी हिस्सेदारी की बात सामने आने के बाद विभाग अब गहराई से मामले की जांच कर रहा है।
कैसे खुली भ्रष्टाचार की पोल
नरसिंहपुर जिले में प्रॉपर्टी और कॉलोनी निर्माण का काम करने वाले संजय राय ने तेंदूखेड़ा एसडीएम कार्यालय में अपनी नई कॉलोनी के प्रस्तावित नक्शे की निरीक्षण रिपोर्ट के लिए आवेदन दिया था। नियमानुसार इस प्रक्रिया में ज्यादा वक्त नहीं लगना चाहिए था,
लेकिन पीड़ित का आरोप है कि कार्यालय में उनके काम को बिना किसी ठोस वजह के लगातार लटकाया जा रहा था। बार-बार दफ्तर के चक्कर काटने से परेशान होकर जब संजय राय ने एसडीएम के स्टेनो सौरभ यादव से सीधा संपर्क किया, तो उसने काम के बदले ₹30,000 की मांग रख दी।
रिश्वत देने के बजाय संजय राय ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया। उन्होंने तुरंत जबलपुर ईओडब्ल्यू के पास पहुंचकर मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही ईओडब्ल्यू की टीम ने मामले का सत्यापन किया और आरोपी को पकड़ने के लिए एक सुनियोजित जाल बिछाया।
जैसे ही संजय राय तय रकम लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे और स्टेनो सौरभ यादव को केमिकल लगे नोट सौंपे, पहले से मुस्तैद ईओडब्ल्यू की टीम ने उसे दबोच लिया। पानी से हाथ धुलवाते ही आरोपी की उंगलियां लाल हो गईं, जिसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उस पर मामला दर्ज कर लिया गया।
’30 में से 5 मेरे, 25 ऊपर के’ रिश्वत में हिस्सेदारी की कथित चर्चा से मचा हड़कंप
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात वह कथित बातचीत है जो अब हर तरफ चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्रों और शिकायतकर्ता के दावों के अनुसार, सौदेबाजी के दौरान स्टेनो सौरभ यादव ने पैसों के बंटवारे को लेकर साफ बात की थी।
उसने कथित तौर पर कहा था कि इस ₹30,000 की रकम में से ₹5,000 उसके अपने काम के हैं, जबकि बाकी के ₹25,000 ‘ऊपर’ भेजने होंगे। दफ्तर के माहौल को देखते हुए इस ‘ऊपर’ शब्द का इशारा सीधे तौर पर एसडीएम की कुर्सी की तरफ माना जा रहा है।
हालांकि, ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने इस बिंदु पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। जांच टीम का कहना है कि आरोपी स्टेनो से पूछताछ की जा रही है और दफ्तर के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अब तक सीधे तौर पर किसी बड़े अधिकारी की संलिप्तता के सबूत न मिले हों, लेकिन जिस तरह से खुलेआम ऊपरी हिस्सेदारी की बात कही गई, उससे जांच की आंच जल्द ही एसडीएम पूजा सोनी तक भी पहुंच सकती है।
सुर्खियों में क्यों हैं एसडीएम पूजा सोनी?
तेंदूखेड़ा में पदस्थ एसडीएम पूजा सोनी पिछले कुछ समय से लगातार स्थानीय और राज्य स्तर पर चर्चा में रही हैं, लेकिन पहले उनकी चर्चा की वजह बेहद सकारात्मक थी। पूजा सोनी ने हाल ही में घोषित हुए यूपीएससी परीक्षा के नतीजों में ऑल इंडिया 249वीं रैंक हासिल की है।
वह जल्द ही मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की सेंट्रल ट्रेनिंग के लिए जाने वाली हैं। इससे पहले उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षा में भी सफलता पाई थी।
पन्ना जिले के एक छोटे से कस्बे देवेंद्रनगर की रहने वाली पूजा सोनी एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं। उनके पिता महेश सोनी पेशे से किसान हैं। पूजा ने साल 2019 में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा पास की थी और बतौर डिप्टी कलेक्टर अपने करियर की शुरुआत की थी।
अब तक के उनके सेवाकाल को काफी साफ-सुथरा और निर्विवाद माना जाता रहा है। यही वजह है कि उनके जाने के ठीक पहले उनके ही दफ्तर में हुए इस बड़े रिश्वतकांड ने लोगों को हैरान कर दिया है। फिलहाल ईओडब्ल्यू हर पहलू को ध्यान में रखकर मामले की कानूनी कस्टडी में जांच आगे बढ़ा रहा है।













